अंकिता भंडारी हत्याकांड में नाम जोड़े जाने पर BJP नेता दुष्यंत गौतम का बड़ा कदम, दिल्ली हाई कोर्ट में दायर किया मानहानि केस

BJP नेता दुष्यंत गौतम का बड़ा कदम, दिल्ली हाई कोर्ट में दायर किया मानहानि केस

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में अपना नाम उछाले जाने से नाराज़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मिला सनावर समेत अन्य लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

2 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग

दुष्यंत गौतम ने अपनी याचिका में कहा है कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ जानबूझकर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाए गए, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कोर्ट से 2 करोड़ रुपये हर्जाने के साथ-साथ उनके खिलाफ पोस्ट की गई कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने का निर्देश देने की मांग की है। इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है।

“राजनीतिक साजिश के तहत उछाला गया नाम”

याचिका में गौतम ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दुर्भावना के चलते उनका नाम एक जघन्य अपराध से जोड़ा गया, जबकि इस मामले से उनका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि जांच एजेंसियों की SIT रिपोर्ट, चार्जशीट और अदालत के किसी भी दस्तावेज में उनका नाम शामिल नहीं है।

क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड

सितंबर 2022 में उत्तराखंड के ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य (पूर्व बीजेपी नेता विनोद आर्य के बेटे) और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्करअंकित गुप्ता को निचली अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
जांच में सामने आया था कि कथित तौर पर एक “वीआईपी गेस्ट” को विशेष सेवा देने से इनकार करने पर अंकिता की हत्या की गई।

सोशल मीडिया वीडियो से उठा विवाद

दिसंबर 2025 में उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो और कथित ऑडियो जारी कर दुष्यंत गौतम को उस “वीआईपी” से जोड़ने का दावा किया था। यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया।

दुष्यंत गौतम का जवाब

दुष्यंत गौतम ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि 24 दिसंबर 2025 के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और पोस्ट सुनियोजित तरीके से गढ़े और फैलाए गए, ताकि उनकी छवि खराब की जा सके।
उन्होंने कोर्ट में अपनी लोकेशन से जुड़े सबूत भी पेश किए हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि घटना के समय वे किसी अन्य स्थान पर मौजूद थे।

कानूनी लड़ाई जारी

गौतम ने कोर्ट से यह भी मांग की है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक दल उनके खिलाफ इस तरह के बिना सबूत आरोप न लगाए। अब सभी की नजरें दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।

यह मामला न सिर्फ एक राजनीतिक विवाद बन चुका है, बल्कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और आरोपों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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