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आईपीएस पूरन कुमार का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार: डबल सुसाइड केस की गुत्थी अब भी उलझी

आईपीएस पूरन कुमार का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

चंडीगढ़। हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की खुदकुशी के आठ दिन बाद आखिरकार उनकी आईएएस पत्नी अमनीत कुमार ने पोस्टमार्टम की अनुमति दे दी। बुधवार को चंडीगढ़ पीजीआई में डॉक्टरों के एक बोर्ड ने मजिस्ट्रेट और फॉरेंसिक टीम की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया। इसके बाद उनके शव को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।


पोस्टमार्टम की मंजूरी से खुला रास्ता

पूरन कुमार के परिवार ने आठ दिनों तक पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं दी थी। मंगलवार को चंडीगढ़ पुलिस ने अदालत से इजाजत लेने की तैयारी की थी, लेकिन इससे पहले बुधवार सुबह आईएएस अमनीत कुमार ने लिखित में पोस्टमार्टम की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि—

“चंडीगढ़ पुलिस और हरियाणा सरकार की ओर से यह भरोसा दिलाया गया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी तथा दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।”

पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई गई और फिर शव परिवार को सौंप दिया गया।


राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

शव को पहले उनके चंडीगढ़ स्थित घर लाया गया, जहां परिजन, साथी अधिकारी और स्थानीय लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। इसके बाद शाम चार बजे सेक्टर-25 के श्मशान घाट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।


अमनीत कुमार ने डीजीपी और एसपी पर लगाए गंभीर आरोप

आईएएस अमनीत कुमार ने अपने पति की मौत के लिए हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर और रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारनिया को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस में दर्ज कराई शिकायत में लिखा है कि—

“मेरे पति को झूठे मामलों में फंसाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इस वजह से उन्होंने आत्महत्या का कदम उठाया।”

उन्होंने दोनों अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है ताकि वे सबूत नष्ट न कर सकें।


आईपीएस पूरन कुमार का सुसाइड नोट

7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित अपने घर के बेसमेंट में वाई पूरन कुमार ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। मौके से 9 पन्नों का सुसाइड नोट मिला था, जिसमें उन्होंने 15 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया।
पहले 8 पन्नों में उन्होंने विभाग में जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, तबादले और प्रमोशन में भेदभाव जैसी बातों का जिक्र किया, जबकि नवें पन्ने में अपनी वसीयत लिखी थी।

सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा था—

“मुझे एक साजिश के तहत झूठे मामले में फंसाया जा रहा है। लगातार जातिवाद और सामाजिक बहिष्कार के चलते मैं मानसिक पीड़ा झेल रहा हूं।”


रिश्वत के मामले से जुड़ा विवाद

पूरन कुमार की मौत से एक दिन पहले रोहतक के अर्बन एस्टेट थाना में एक एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें एक शराब कारोबारी से रिश्वत लेने के आरोप में उनके पूर्व स्टाफ हेड कॉन्स्टेबल को गिरफ्तार किया गया था। एफआईआर में पूरन कुमार का नाम भी शामिल किया गया, जिसे लेकर उन्होंने अपने सुसाइड नोट में डीजीपी और एसपी पर साजिश का आरोप लगाया।


एएसआई संदीप लाठर की मौत से जुड़ी नई कड़ी

पूरन कुमार की खुदकुशी के कुछ दिनों बाद एएसआई संदीप लाठर ने भी आत्महत्या कर ली। परिवार ने पोस्टमार्टम से पहले न्यायिक जांच की मांग की है। संदीप ने अपने अंतिम वीडियो में आईपीएस पूरन कुमार और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।


जांच के घेरे में आला अधिकारी

सुसाइड नोट और शिकायत के बाद हरियाणा सरकार ने डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर और एसपी नरेंद्र बिजारनिया को छुट्टी पर भेज दिया है। वहीं, ओपी सिंह को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया है।

पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में जिन 15 अधिकारियों का नाम लिखा, उनमें पूर्व और वर्तमान मुख्य सचिव, कई एडीजीपी और आईजी स्तर के अधिकारी शामिल हैं।


निष्पक्ष जांच की मांग

आईएएस अमनीत कुमार ने कहा है कि उन्हें न्यायिक व्यवस्था और पुलिस जांच टीम पर पूरा भरोसा है और वह जांच में हर संभव सहयोग करेंगी ताकि सच्चाई सामने आ सके।
पूरन कुमार के परिवार और प्रशासनिक हलकों में अब यह सवाल गूंज रहा है — क्या हरियाणा के इस डबल सुसाइड केस की गुत्थी सुलझ पाएगी?

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