दिल्ली में नक्सली कमांडर मांडी हिडमा की मौत के विरोध में हुए प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार आरोपियों को लेकर शनिवार को अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इंडिया गेट, कर्तव्य पथ और संसद मार्ग पर हुए इन प्रदर्शनों के सिलसिले में पकड़े गए 23 में से 22 लोगों को पटियाला हाउस कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस दौरान कई आरोपियों ने दावा किया कि पुलिस कस्टडी में उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया।
प्रदर्शन के बाद बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां
दिल्ली पुलिस ने बताया कि रविवार को हुए प्रदर्शन में नक्सल कमांडर हिडमा की मौत का विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और नारेबाज़ी की। संसद मार्ग और कर्तव्य पथ क्षेत्रों में कुल दो FIR दर्ज की गईं, जिनमें 23 लोगों को आरोपी बनाया गया।
शनिवार को कोर्ट में इनमें से 6 आरोपियों को पेश किया गया, जिनमें 5 बालिग थे और एक ने खुद को नाबालिग बताया।
पुलिस ने मांगी कस्टडी, कोर्ट ने नहीं मानी दलीलें
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से आरोपियों की दो दिन की रिमांड मांगी। पुलिस का कहना था कि:
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आरोपी पूरी तैयारी के साथ प्रदर्शन में आए थे,
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उन्होंने पुलिसकर्मियों पर पेपर पाउडर स्प्रे किया,
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कई वीडियो में वे पुलिस पर धक्का-मुक्की करते दिख रहे हैं।
पुलिस का यह भी तर्क था कि हिरासत मिलने पर उनकी नक्सल लिंक जांचने में मदद मिलेगी।
लेकिन कोर्ट ने पुलिस की दलीलें स्वीकार नहीं कीं और कहा कि अभी रिमांड का कोई पर्याप्त आधार नहीं दिखता।
आरोपियों का आरोप—हिरासत में पीटा गया, दुर्व्यवहार हुआ
सुनवाई के दौरान कई आरोपियों ने बताया कि पुलिस कस्टडी में:
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उनके साथ मारपीट हुई,
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धमकाया गया,
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महिला प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने गलत तरीके से छुआ।
कोर्ट ने इस आरोप को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को कमरे से बाहर भेजा और आरोपियों से अलग से बातचीत की। एक आरोपी ने अपने चोट के निशान दिखाए। मेडिकल रिपोर्ट में गर्दन की चोट दर्ज मिली, जिसे पुलिस ने पुरानी चोट बताया।
बचाव पक्ष का तर्क—ये छात्र हैं, FIR में नक्सलवाद का जिक्र नहीं
आरोपियों के वकीलों ने कहा कि:
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सभी आरोपी पढ़े-लिखे छात्र हैं,
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उनका आंदोलन जल–जंगल–जमीन और प्रदूषण से जुड़ा था,
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FIR में कहीं भी नक्सलवाद का आरोप नहीं लगाया गया।
बचाव पक्ष ने अदालत से गुहार लगाई कि छात्रों को अपराधी जैसा व्यवहार न मिले और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान दिया जाए।
अदालत का फैसला—अभी 3 दिन की न्यायिक हिरासत
कोर्ट ने दोनों FIR में गिरफ्तार कुल 17 आरोपियों को 3 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। ये सभी अब 27 नवंबर को दोबारा अदालत में पेश किए जाएंगे।
कर्तव्य पथ वाली FIR में 6 आरोपी थे, जिनमें से:
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5 को दो दिन की न्यायिक हिरासत,
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1 आरोपी को सेफ हाउस भेजा गया है, क्योंकि वह अपनी नाबालिग उम्र साबित करने की कोशिश कर रहा है।
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि हिरासत की मांग वे तब करेंगे जब इलेक्ट्रॉनिक सबूत—जैसे मोबाइल फोन और वीडियो फुटेज—की फोरेंसिक रिपोर्ट आ जाएगी।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बयानबाज़ी तेज
जहां पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने हिंसक तरीके अपनाए, वहीं आरोपियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें बिना वजह मारा-पीटा और प्रताड़ित किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बात सुनी और कहा कि मारपीट की शिकायतों की उचित जांच कराई जाएगी।
मामला बढ़ा संवेदनशील, अगली सुनवाई पर नज़र
इंडिया गेट और संसद मार्ग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में हुए इस विरोध-प्रदर्शन को लेकर पुलिस सतर्क है। कोर्ट की अगली सुनवाई पर फैसला किया जाएगा कि आरोपियों को आगे हिरासत में लिया जाए या जमानत दी जाए।
यह मामला अब सिर्फ पुलिस बनाम प्रदर्शनकारी नहीं रह गया है, बल्कि मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पुलिस आचरण पर भी बहस की शुरुआत कर चुका है।