नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट को लेकर राजनीति गरमा गई है। जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस आयोजन को “अव्यवस्थित पीआर” करार दिया, वहीं पार्टी के ही सांसद शशि थरूर ने समिट की खुलकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में छोटी-मोटी गड़बड़ियां होना सामान्य बात है।
इंडिया एआई समिट में वैश्विक भागीदारी
दिल्ली में चल रहे इस समिट में दुनिया भर के तकनीकी विशेषज्ञों और कई देशों के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित कई राष्ट्राध्यक्ष भारत पहुंचे। इस आयोजन का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग और जिम्मेदार विकास पर चर्चा करना है।
शशि थरूर ने कहा कि समिट के शुरुआती दो दिन बेहद सफल रहे। उन्होंने बताया कि कई राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों ने एआई के विकास में एक “एकीकृत वैश्विक दृष्टिकोण” की जरूरत पर जोर दिया है, जिसमें समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को प्राथमिकता दी जाए।
गलगोटिया विवाद पर क्या बोले थरूर?
समिट के दौरान गलगोटिया से जुड़े विवाद पर भी सवाल उठे। इस पर थरूर ने कहा कि इतने बड़े आयोजन में कुछ व्यवस्थागत कमियां हो सकती हैं, लेकिन इससे पूरे कार्यक्रम की उपलब्धियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत एआई क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस दिशा में उसकी सक्रिय भूमिका सराहनीय है।
राफेल पर टिप्पणी और रक्षा नीति पर समर्थन
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की राफेल सौदे को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि राफेल विमान के कुछ हिस्सों का निर्माण अब भारत में भी हो रहा है। इससे देश की रक्षा क्षमता मजबूत होगी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी रक्षा तैयारियां इसलिए मजबूत करता है ताकि कोई देश उसे कमजोर समझकर आक्रामक कदम न उठाए। यह नीति पूरी तरह रक्षात्मक है और इस मुद्दे पर वह सरकार का समर्थन करते हैं।
‘केरल स्टोरी 2’ पर भी रखी राय
फिल्म केरल स्टोरी 2 को लेकर पूछे गए सवाल पर थरूर ने कहा कि पहली फिल्म ने समाज में विभाजन पैदा किया था। उन्होंने दावा किया कि हजारों लोगों के धर्मांतरण का आंकड़ा सही नहीं था और वास्तविक संख्या बहुत कम थी।
थरूर ने कहा कि छिटपुट घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उनके बचपन में फिल्म अमर अकबर एंथनी जैसी फिल्मों को मनोरंजन कर में छूट मिलती थी, क्योंकि वे सामाजिक सौहार्द का संदेश देती थीं।
नई किताब का विमोचन
शशि थरूर ने यह बातें अपनी नई पुस्तक The Sage Who Reimagined Hinduism: The Life, Lessons and Legacy of Sri Narayana Guru के विमोचन कार्यक्रम के बाद कहीं। यह कार्यक्रम दिल्ली स्थित India International Centre में आयोजित किया गया था।
इस पुस्तक का विमोचन भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया। उन्होंने पुस्तक को नारायण गुरु की आध्यात्मिक और सामाजिक विरासत को संरक्षित करने वाला महत्वपूर्ण कार्य बताया।
नारायण गुरु की विरासत पर जोर
थरूर की यह पुस्तक केरल के महान समाज सुधारक नारायण गुरु के जीवन और विचारों पर आधारित है। नारायण गुरु ने जातिगत भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया और “एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर” का संदेश दिया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके विचार आज भी समानता और भाईचारे का प्रेरक संदेश देते हैं। मंदिरों को सभी के लिए खोलने और शिक्षा के प्रसार के उनके प्रयासों ने समाज में गहरा परिवर्तन लाया।
निष्कर्ष
इंडिया एआई समिट को लेकर राजनीतिक मतभेद भले ही सामने आए हों, लेकिन शशि थरूर ने इसे भारत की वैश्विक तकनीकी नेतृत्व क्षमता का प्रतीक बताया। साथ ही, उन्होंने रक्षा, सिनेमा और सामाजिक मुद्दों पर भी संतुलित और स्पष्ट राय रखी। यह समिट भारत के एआई भविष्य और वैश्विक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।