उत्तरकाशी में बादल फटने से मचा हड़कंप
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में शनिवार सुबह एक बड़ी प्राकृतिक आपदा की खबर सामने आई। जिले की बड़कोट तहसील के सिलाई बैण्ड क्षेत्र में अतिवृष्टि और बादल फटने की घटना हुई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
इस खबर के सामने आते ही एसडीआरएफ (SDRF), पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें तत्काल घटनास्थल पर रवाना हुईं और राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं।
यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-94) पर आया मलबा, आवागमन बाधित
बादल फटने की इस घटना का सबसे बड़ा असर यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-94) पर पड़ा है। सिलाई बैण्ड के पास दो से तीन स्थानों पर मलबा आ जाने के कारण सड़क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।
प्रशासन ने एनएच विभाग को तत्काल सूचित किया है और मार्ग को जल्द से जल्द साफ कराने का प्रयास किया जा रहा है ताकि यात्रियों और स्थानीय लोगों को राहत मिल सके।
कृषि भूमि को हुआ नुकसान, जनहानि नहीं
इस प्राकृतिक आपदा से कुथनौर गांव के कई ग्रामीणों की खेती योग्य भूमि को नुकसान पहुंचा है। मलबा और पानी की तेज़ धार से फसलें बह गईं और खेतों में मिट्टी भर गई।
हालांकि, प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि अब तक किसी प्रकार की जनहानि या पशुहानि की सूचना नहीं मिली है, जो राहत की बात है। प्रभावित क्षेत्र में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
राहत और बचाव कार्य तेज़ी से जारी
एसडीआरएफ और पुलिस की टीमों ने घटनास्थल पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। क्षेत्र में घरों, खेतों और रास्तों की स्थिति की निगरानी की जा रही है। अगर कोई फंसा हुआ पाया जाता है तो तुरंत राहत सामग्री और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन से संपर्क करें।
प्रशासन सतर्क, आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी तेज बारिश की संभावना जताई है। इसके चलते उत्तरकाशी और आसपास के क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक स्थिति में ऊंचे स्थानों की ओर जाने की सलाह दी है।
निष्कर्ष: सजगता और राहत कार्यों से टली बड़ी त्रासदी
उत्तरकाशी की इस घटना में भले ही कुछ हानि हुई हो, लेकिन प्रशासन और राहत दलों की तत्परता के कारण एक बड़ी त्रासदी टल गई। भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन टीमें और नागरिकों की सजगता बेहद जरूरी है।