उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक प्राइवेट कंपनी के सिक्योरिटी गार्ड ने ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जान दे दी। मृतक की जेब से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें उसने अपनी पत्नी के अफेयर और पुलिस की अनदेखी का आरोप लगाया है। इस घटना ने समाज में गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुसाइड नोट में पत्नी पर गंभीर आरोप
सुसाइड नोट में मृतक राकेश तिवारी ने अपनी पत्नी अर्चना मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नोट में लिखा था कि उसकी पत्नी के पिछले चार सालों से किसी अन्य व्यक्ति के साथ अफेयर था। उसने अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया और लिखा, “I LOVE U, I MISS U, आखिर मेरे प्यार में क्या कमी रह गई थी कि तुमने मुझे यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।”
राकेश ने यह भी आरोप लगाया कि उसने पुलिस से मदद मांगी थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने लिखा कि महिला थाना के पुलिसकर्मियों ने पत्नी के अफेयर के बारे में शिकायत सुनने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया और पैसे की मांग की। इस घटना ने कन्नी काटते हुए पुलिस और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शव से जुड़ी जानकारी और पुलिस की जांच
राकेश तिवारी का शव देवरिया सदर रेलवे स्टेशन के आउटर पर रेलवे ट्रैक पर पाया गया। उसकी शरीर के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए थे, और उसका सिर तीन सौ मीटर दूर पाया गया। पुलिस ने शव को पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के प्रभारी दिनेश कुमार पांडेय ने पुष्टि करते हुए बताया कि आत्महत्या का मामला सामने आया है और सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। उन्होंने कहा, “मृतक की पत्नी ने शव की शिनाख्त की और वापस चली गई। अब अगर तहरीर मिलती है तो हम कानूनी कार्रवाई करेंगे।”
राकेश तिवारी का पारिवारिक जीवन और दुखों की कहानी
राकेश तिवारी का विवाह अर्चना मिश्रा से 14 फरवरी 2009 को हुआ था। शादी के बाद राकेश और अर्चना का जीवन सामान्य था। उनके दो बेटे और दो बेटियां थीं। राकेश VFS नामक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड के पद पर कार्यरत थे।
हालांकि, समय के साथ रिश्ते में तनाव आ गया। राकेश को जब अपनी पत्नी के अफेयर के बारे में पता चला, तो उन्होंने कई बार कोशिश की, लेकिन उनकी पत्नी ने उन्हें नजरअंदाज किया। इससे परेशान होकर राकेश ने पुलिस से भी मदद मांगी, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। राकेश की पत्नी अर्चना मिश्रा मायके में एक अन्य व्यक्ति के साथ रहने लगी, जबकि चारों बच्चे उसके पास ही रहते थे। राकेश इस स्थिति से टूट गए और उन्होंने आत्महत्या का कदम उठाया।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
यह घटना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाती है। पुलिस की अनदेखी और प्रशासन का लचर रवैया अक्सर ऐसे मामलों में पीड़ितों को न्याय नहीं दिलवाता। राकेश तिवारी का मामला यह दर्शाता है कि जब किसी व्यक्ति को न्याय नहीं मिलता, तो वह आत्महत्या जैसी खतरनाक कदम उठा सकता है।
समाज में जागरूकता की आवश्यकता
यह घटना एक और संकेत है कि समाज में पारिवारिक तनाव, रिश्तों की समस्याएं और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। मनोवैज्ञानिक सहायता, कानूनी जागरूकता और पारिवारिक सलाह इस तरह की घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
निष्कर्ष
देवरिया की इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि पारिवारिक समस्याओं के परिणामस्वरूप आत्महत्या जैसी घटनाएं हो सकती हैं। पुलिस और प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और पीड़ितों को समय पर न्याय मिलना चाहिए। इसके अलावा, परिवारों को आपसी समस्याओं को हल करने के लिए कानूनी और मानसिक मदद प्राप्त करने के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।
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