एम्स में डॉक्टरों की कमी: सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं खतरे में

एम्स में डॉक्टरों की भारी कमी, आरटीआई से हुआ खुलासा

एम्स में डॉक्टरों की भारी कमी, आरटीआई से हुआ खुलासा

देश के सबसे प्रतिष्ठित और प्रमुख सरकारी अस्पतालों में से एक, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में डॉक्टरों की भारी कमी सामने आई है। एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत हुए खुलासे के अनुसार, एम्स में डॉक्टर्स की संख्या जरूरत से काफी कम है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है। यह खुलासा मरीजों के लिए एक बड़ा चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि एम्स जैसे प्रतिष्ठित अस्पताल में भी डॉक्टरों की कमी गंभीर समस्या बन चुकी है।

आरटीआई से हुआ खुलासा: डॉक्टरों की कमी का खुलासा

आरटीआई के जरिए प्राप्त जानकारी के अनुसार, एम्स में विभिन्न विभागों में हजारों डॉक्टरों की पदों पर नियुक्ति की आवश्यकता है। जानकारी के मुताबिक, एम्स में चिकित्सकों की भारी कमी के कारण मरीजों को उचित इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। अस्पताल में नियमित ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) और इमरजेंसी सेवाओं में भी मरीजों को देर से इलाज मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

एम्स में डॉक्टरों की कमी का असर

इस कमी का सबसे ज्यादा असर मरीजों पर पड़ रहा है। एम्स में मरीजों की भारी संख्या होने के बावजूद डॉक्टरों की संख्या में कमी के कारण इलाज में देरी हो रही है। कई मरीजों का कहना है कि उन्हें इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और इमरजेंसी सेवाओं में भी बॉटलनेक की स्थिति बन गई है। इससे पहले भी एम्स के डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी के मुद्दे को उठाया गया था, लेकिन अब आरटीआई के जरिए इसकी वास्तविक स्थिति सामने आई है।

क्यों हो रही है डॉक्टरों की कमी?

एम्स के डॉक्टरों की कमी का मुख्य कारण है पदों का खाली रहना। कई पदों पर डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। साथ ही, अस्पताल में काम करने के लिए अधिक कर्मचारियों को आकर्षित करने के उपायों की कमी भी है। इसके अलावा, सरकार की ओर से स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट में कटौती और डॉक्टरों के लिए बेहतर कार्य वातावरण की कमी भी एक प्रमुख कारण है। इस समस्या का समाधान समय रहते नहीं किया गया तो इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

क्या हैं सरकार के कदम?

सरकार ने एम्स में डॉक्टरों की भर्ती के लिए कुछ कदम उठाने का वादा किया है, लेकिन अब तक इन कदमों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो सका है। सरकार ने हाल ही में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए विभिन्न अस्पतालों में नए पदों की सृजन की बात कही थी, लेकिन यह कदम कब तक लागू होगा, इस पर कोई स्पष्टता नहीं दी गई है।

मरीजों के लिए क्या है समाधान?

एम्स जैसे प्रतिष्ठित अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सरकार को इस समस्या को प्राथमिकता से हल करना चाहिए। डॉक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ उन्हें कार्यस्थल पर उचित सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। इसके अलावा, अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की भर्ती के लिए एक स्थायी और प्रभावी योजना बनानी होगी, ताकि भविष्य में ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े।

निष्कर्ष

एम्स में डॉक्टरों की कमी की समस्या को जल्द से जल्द सुलझाने की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को बेहतर और त्वरित इलाज मिल सके। यदि सरकार और अस्पताल प्रशासन समय रहते इस मुद्दे पर ध्यान नहीं देते हैं, तो यह स्वास्थ्य सेवाओं पर और भी गंभीर असर डाल सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए डॉक्टरों की नियुक्ति और उन्हें बेहतर कार्य वातावरण प्रदान करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

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