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ऑपरेशन सिंदूर पर सियासी संग्राम: संसद से लेकर चुनावी मंच तक गरमाई बहस

संसद से लेकर चुनावी मंच तक गरमाई बहस

संसद का मानसून सत्र शुरू, पहले ही दिन हंगामा

संसद का मानसून सत्र 21 अगस्त तक चलेगा, लेकिन पहले ही दिन का माहौल विपक्ष और सरकार के तीखे टकराव की भेंट चढ़ गया। विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले पर चर्चा की मांग को लेकर सदन में जोरदार विरोध दर्ज कराया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में शोरगुल और वेल में नारेबाजी के चलते कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा।


क्या है ऑपरेशन सिंदूर?

22 जून को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा की गई तेज कार्रवाई को ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद सत्र से पहले अपने संबोधन में कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने 100% लक्ष्य प्राप्त किया।” मोदी ने यह भी जोड़ा कि भारतीय सैन्य शक्ति का यह नया स्वरूप दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बना है।


विपक्ष का पलटवार और चर्चा की मांग

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से जवाब की मांग की। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रमोद तिवारी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने सीजफायर और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए शून्यकाल स्थगन नोटिस भी दिया।


सरकार की तैयारी और रणनीति

सरकार की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि वह “राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा से पीछे नहीं हटेगी।” इसके साथ ही सरकार ने इस सत्र में 17 विधेयक पेश करने की घोषणा भी की है, जिसे वह अपने बहुमत के दम पर पारित करवाने की योजना में है।

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विपक्ष में एकता की कमी बनी बड़ी चुनौती

हालांकि विपक्ष ने एकजुटता दिखाने की कोशिश की, लेकिन अंदरूनी मतभेद साफ नजर आए। शुरुआत में समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस की मांगों का समर्थन नहीं किया। वहीं, आम आदमी पार्टी और NCP (शरद पवार गुट) का रवैया भी विपक्षी एकता के लिए बाधा बना।


सीजफायर पर अमेरिकी बयान ने बढ़ाया विवाद

सबसे बड़ा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान सीजफायर की घोषणा की। विपक्ष ने सवाल उठाया कि भारत की तरफ से पहले क्यों नहीं जानकारी दी गई? सरकार ने स्पष्ट किया कि सीजफायर की पहल पाकिस्तान ने की और यह द्विपक्षीय समझौते के तहत हुआ।


बिहार चुनाव की छाया में संसद सत्र

सभी बहसों और हंगामों की पृष्ठभूमि में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की झलक साफ नजर आ रही है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही संसद के मंच का उपयोग चुनावी एजेंडे को मजबूत करने के लिए कर रहे हैं। चाहे बहस हो या हंगामा, इसका असर बिहार की राजनीति पर जरूर पड़ेगा।


निष्कर्ष: चर्चा या केवल राजनीति?

सवाल यह है कि संसद में वास्तविक बहस होगी या यह सत्र भी शोरगुल की भेंट चढ़ेगा? ऑपरेशन सिंदूर, पहलगाम हमला और सीजफायर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गंभीर चर्चा की जरूरत है, जिससे देश को सटीक जानकारी मिले और लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हो।

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