स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, आवारा कुत्तों की संख्या और रेबीज़ संक्रमण बना बड़ी चुनौती
कर्नाटक में कुत्ते के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। जनवरी 2025 से जून 2025 के बीच राज्य में 2,31,091 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 19 लोगों की मौत रेबीज़ संक्रमण से हो गई। यह आंकड़े राज्य स्वास्थ्य विभाग के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) द्वारा सार्वजनिक किए गए हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार मामलों में 36% की वृद्धि दर्ज की गई है।
कहां सबसे ज़्यादा मामले सामने आए?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज़्यादा मामले विजयपुरा जिले में दर्ज किए गए। इसके बाद बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) क्षेत्र में 13,831 केस सामने आए। अन्य प्रभावित जिलों में हसन, दक्षिण कन्नड़, बागलकोट, बेंगलुरु ग्रामीण (4,408 मामले) और बेंगलुरु शहरी (8,878 मामले) शामिल हैं।
वहीं, कुत्ते के काटने के सबसे कम मामले यादगीर, चामराजनगर और कोडागु जिलों से सामने आए।
रेबीज़ से मौत के आंकड़े भी चिंताजनक
इस साल जनवरी से जून के बीच 19 लोगों की जान रेबीज़ के कारण गई। इसमें से 9 मौतें बेंगलुरु शहरी क्षेत्र में दर्ज की गईं। इसके बाद बेलगावी में 5, जबकि बागलकोट, बल्लारी, चिक्कबल्लापुरा और शिवमोग्गा में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई।
2024 में पूरे साल में 3.6 लाख कुत्ते के काटने के केस और 42 रेबीज़ से मौतें दर्ज की गई थीं। इससे साफ है कि स्थिति बिगड़ती जा रही है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में हुबली में एक तीन साल की बच्ची पर दो आवारा कुत्तों के हमले का वीडियो वायरल हुआ, जिसने सोशल मीडिया और स्वास्थ्य विभाग में चिंता की लहर पैदा कर दी। वीडियो में बच्ची को कुत्ते सड़क पर घसीटते हुए दिखाई दिए। इसके बाद सरकार और स्थानीय निकायों की भूमिका पर सवाल उठे।
स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव हर्ष गुप्ता ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा,
“अब मामलों की रिपोर्टिंग ज्यादा सटीक तरीके से हो रही है, जिससे संख्या ज्यादा लग रही है। पहले भी ऐसी घटनाएं होती थीं, लेकिन उनका सही डेटा उपलब्ध नहीं होता था।”
उन्होंने बताया कि विभाग कई मोर्चों पर काम कर रहा है:
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डॉक्टरों को प्रशिक्षण देना
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सभी सरकारी अस्पतालों में दवाएं और एंटी-रेबीज़ इंजेक्शन उपलब्ध कराना
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ग्रामीण और शहरी निकायों को कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रण के निर्देश देना
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आम लोगों में जागरूकता फैलाना
हर्ष गुप्ता ने यह भी कहा कि मामूली खरोंच या काटने पर भी तुरंत चिकित्सा लेनी चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण फैल सकता है।
रेबीज़ बना अधिसूचित रोग
2022 से कर्नाटक महामारी रोग अधिनियम, 2020 के तहत मानव रेबीज़ को एक अधिसूचित रोग घोषित किया गया है। इसके तहत सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों को हर संदिग्ध, संभावित या पुष्टि किए गए रेबीज़ मामले की जानकारी राज्य स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य है। इससे मामलों की मॉनिटरिंग बेहतर तरीके से हो पा रही है।
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या बनी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और टीकाकरण की कमी इस संकट को बढ़ा रही है। गुप्ता ने माना कि मौतों को रोकने के लिए और भी कई कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा,
“जनसंख्या नियंत्रण, टीकाकरण और त्वरित इलाज ही समाधान हैं। इन प्रयासों को और तेज़ करने की जरूरत है।”
निष्कर्ष
कर्नाटक में कुत्ते के काटने के बढ़ते मामलों और रेबीज़ से हो रही मौतों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। यह समय है जब सरकार, स्थानीय निकाय और आम नागरिक मिलकर इस संकट से निपटने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।

