कर्नाटक के पूर्व मंत्री और BJP विधायक प्रभु चौहान के बेटे प्रतीक चौहान पर एक युवती ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने बीदर स्थित महिला पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि प्रतीक ने उससे सगाई के बाद शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण किया। पुलिस ने इस आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी गई है।
सगाई के बाद भी शादी से किया इनकार
पीड़िता के अनुसार, 25 दिसंबर 2023 को प्रतीक और उसकी सगाई हुई थी। सगाई के बाद प्रतीक ने यह वादा किया कि वह जल्दी ही उससे शादी करेगा। इसी विश्वास के चलते युवती ने उसका साथ दिया। लेकिन समय बीतता गया और प्रतीक बार-बार शादी की बात को टालता रहा।
अलग-अलग शहरों में हुआ शोषण
शिकायत के अनुसार, प्रतीक ने युवती को बेंगलुरु, लातूर (महाराष्ट्र) और शिरडी जैसे शहरों में निजी होटलों में ले जाकर कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने बताया कि जब भी वह यौन संबंध बनाने से इनकार करती, प्रतीक उसे धमकी देता कि अगर उसने साथ नहीं दिया, तो वह शादी नहीं करेगा।
परिवार के सामने भी अपमान
5 जुलाई 2025 को पीड़िता और उसके परिवार ने प्रतीक के घर जाकर शादी की तारीख तय करने की कोशिश की। लेकिन वहां प्रतीक और उसके परिवार ने कथित रूप से उन्हें कहकर भगा दिया, “हम आपकी बेटी से शादी नहीं करेंगे, जो करना है कर लो।“
कई बार धमकी और मारपीट का भी आरोप
पीड़िता का यह भी कहना है कि प्रतीक ने न सिर्फ मानसिक रूप से परेशान किया, बल्कि शारीरिक रूप से भी उसे चोट पहुँचाई। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि प्रतीक ने उसे कई बार धमकी दी कि अगर उसने किसी को कुछ बताया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
प्रतीक चौहान पर दर्ज हुईं ये धाराएं
बीदर महिला पुलिस थाने में दर्ज FIR में निम्नलिखित धाराएं जोड़ी गई हैं:
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धारा 376 (एन): बार-बार रेप का आरोप
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धारा 366: शादी के लिए अपहरण
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धारा 324: जानबूझकर चोट पहुंचाना
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धारा 506: आपराधिक धमकी देना
इन धाराओं के तहत केस दर्ज कर पुलिस ने आगे की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच जारी, बयान दर्ज कर रही टीम
पुलिस अधिकारी ने बताया कि पीड़िता के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जल्द ही प्रतीक चौहान से पूछताछ की जाएगी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है।
राजनीतिक माहौल में हलचल
चूंकि मामला एक राजनीतिक परिवार से जुड़ा है, इसलिए इसने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि BJP और प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाते हैं।
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की पहुंच कितनी प्रभावी है। कानून को अपना काम करना चाहिए और यदि आरोपी दोषी पाया जाता है, तो उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए।

