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कानपुर ‘लुटेरी दुल्हन’ केस में बड़ा मोड़: सबूत न मिलने पर कोर्ट ने दिव्यांशी चौधरी को दी जमानत, पुलिस को फटकार

कानपुर ‘लुटेरी दुल्हन’ केस में बड़ा मोड़

कानपुर में चर्चित ‘लुटेरी दुल्हन’ मामला—कोर्ट का अहम फैसला

कानपुर के चर्चित ‘लुटेरी दुल्हन’ केस में बुधवार को बड़ा मोड़ आया। अदालत ने पुलिस की रिमांड अर्जी को खारिज करते हुए आरोपी दिव्यांशी चौधरी को कोर्ट परिसर से ही रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस रिमांड के समर्थन में कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।

यह फैसला पुलिस के लिए एक बड़ी झटका साबित हुआ और अधिकारियों से जवाब-तलब शुरू हो गया है।


कोर्ट ने पुलिस के दावों को बताया कमजोर

अदालत ने अपने निर्णय में साफ कहा कि पुलिस की ओर से प्रस्तुत सामग्री संदिग्ध और अपर्याप्त है।
कोर्ट के अनुसार:

कोर्ट ने इसलिए रिमांड को पूरी तरह अस्वीकार्य मानते हुए दिव्यांशी को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया।


पुलिस को फटकार, अधिकारियों से पूछा–जांच में कमी क्यों?

रिमांड अर्जी खारिज होने के साथ ही यह मामला कानपुर पुलिस के लिए चुनौती बन गया।
डीसीपी ने तत्काल प्रभाव से संबंधित विवेचक और अधिकारियों को तलब किया और पूछा:

प्रारंभिक समीक्षा में यह सामने आया कि एफआईआर में दर्ज कई धाराओं के समर्थन में जरूरी रिकॉर्ड और प्रमाण रिमांड के दौरान उपलब्ध ही नहीं थे।


सब-इंस्पेक्टर की शिकायत पर हुआ था केस दर्ज

यह मामला नवंबर 2024 में तब शुरू हुआ जब ग्वालटोली थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर आदित्य ने अपनी पत्नी दिव्यांशी चौधरी पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई।

आदित्य, मूल रूप से बुलंदशहर के निवासी, ने आरोप लगाया कि 17 फरवरी 2024 को मेरठ के बड़ा मवाना निवासी दिव्यांशी से हुई उनकी शादी ठगी की साजिश का हिस्सा थी।

उन्होंने कहा कि:


वकील ने कहा—गिरफ्तारी और रिमांड प्रक्रिया में भारी अनियमितता

अदालत में दिव्यांशी की ओर से अधिवक्ता वरुण भसीन ने दलील देते हुए कहा कि:

वकील ने कहा कि ऐसा लगता है कि पुलिस ने बिना फाइल पढ़े रिमांड मिलने की उम्मीद की थी—जिस पर अदालत ने भी असहमति जताई।


कोर्ट ने कहा—कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि:


निष्कर्ष

कानपुर के इस बहुचर्चित मामले में अदालत का फैसला पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है।
दिव्यांशी चौधरी की जमानत और रिमांड अर्जी का खारिज होना बताता है कि जांच में कमी और सबूतों की अनुपस्थिति किस तरह एक बड़े केस को कमजोर बना सकती है।

मामले की समीक्षा पुलिस विभाग में अब भी जारी है, और अधिकारी जांच में सुधार तथा जिम्मेदारियों की पहचान पर काम कर रहे हैं।

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