प्राकृतिक आपदा से दहला चसोटी गांव, उमर अब्दुल्ला ने पहुंचकर संभाला मोर्चा
किश्तवाड़, जम्मू-कश्मीर – जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चसोटी गांव में हाल ही में आई फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) ने भारी तबाही मचाई है। अब तक मलबे से 65 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव कार्य तेज़ी से जारी है, जिसमें इंडियन आर्मी, NDRF, SDRF, पुलिस और स्थानीय प्रशासन जी-जान से जुटे हुए हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने किया प्रभावित इलाकों का दौरा
शनिवार सुबह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सबसे पहले गुलाबगढ़ के पद्दर ब्लॉक और फिर चसोटी गांव का दौरा किया। उन्होंने वहां पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और राहत कार्य का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा,
“हम राहत और बचाव कार्य के पूरा होने के बाद जांच करेंगे कि क्या मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई पूर्व तैयारी की जा सकती थी।”
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने उनसे बात कर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी कई एजेंसियां
इस त्रासदी के बाद से रेस्क्यू ऑपरेशन 24 घंटे लगातार चल रहा है। सेना, NDRF, SDRF और पुलिस की टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। स्थानीय प्रशासन भी मलबा हटाने, राहत सामग्री पहुंचाने और घायलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में सक्रिय है।
BRO और एयरफोर्स का भी सहयोग
राहत कार्यों में BRO (Border Roads Organisation) की मशीनरी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जो सड़कों से मलबा हटाने का कार्य कर रही है। इसके अलावा एयरफोर्स और सीआरपीएफ की टीमों ने भी तत्काल मोर्चा संभाला।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की प्रतिक्रिया
इस हादसे पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बयान देते हुए कहा,
“सरकार ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कार्रवाई की। रातों-रात आवश्यक उपकरण और राहत सामग्री यहां पहुंचाई गई। प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से हालात पर नजर बनाए हुए हैं।”
जनहानि के साथ-साथ संपत्ति का भी बड़ा नुकसान
फ्लैश फ्लड के चलते कई घर, दुकानें और निजी संपत्तियां पूरी तरह तबाह हो गई हैं। सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं और कई परिवारों का जीवन हमेशा के लिए बदल गया है।
राहत सामग्री और मेडिकल सहायता जारी
सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री, पीने का पानी, टेंट और मेडिकल सहायता लगातार पहुंचाई जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे तैनात है।
निष्कर्ष: राहत कार्य जारी, ज़िंदगी की तलाश में जुटी उम्मीदें
किश्तवाड़ की इस त्रासदी ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि सरकार, सेना और राहत एजेंसियां पूरी कोशिश में जुटी हैं, लेकिन लापता लोगों की सलामती की दुआ पूरे देश में की जा रही है।
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