कश्मीर के किश्तवाड़ में प्राकृतिक आपदा: मलबे में जिंदगी की तलाश
किश्तवाड़, जम्मू-कश्मीर, 15 अगस्त 2025: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में बादल फटने के कारण मची तबाही ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हैं और सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। चिनाब नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाने से नदी ने अपने साथ मकान, गाड़ियां, मंदिर, पुल और लोगों की जिंदगियां बहा लीं। प्रशासन और राहत एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए दिन-रात संघर्ष कर रही हैं, और सेना, NDRF, SDRF और पुलिस जवानों द्वारा किए जा रहे प्रयासों से कुछ लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
चशोटी और पड्डर ताशोति इलाकों में बादल फटने से आई विनाशकारी बाढ़
गुरुवार, 7 अगस्त 2025, को चशोटी और पड्डर ताशोति इलाके में अचानक बादल फटा, और चिनाब नदी का जलस्तर अत्यधिक बढ़ गया। कुछ ही पलों में तेज बहाव ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया, और नदी के उफान ने सैकड़ों लोगों के घरों को बहा दिया। मकान ढह गए, गाड़ियां बर्बाद हो गईं, और सड़कें विशाल पत्थरों से बंद हो गईं। पूरे गांव की स्थिति खंडहर में बदल गई, और स्थानीय लोग किसी तरह अपनी जान बचाकर भागने के लिए मजबूर हो गए।
अब तक 65 मौतें और सैकड़ों घायल, लापता लोगों का पता नहीं
इस प्राकृतिक आपदा में 65 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है, और 100 से ज्यादा लोग घायल हैं। कई लोग लापता हैं और राहत एजेंसियां लगातार उन्हें खोजने में जुटी हैं। राज्य प्रशासन और राहत दल के जवान मलबे में दबे हुए लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस और सेना के जवान, NDRF और SDRF के सदस्य, मशीनों और रस्सियों के सहारे मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर लिखा कि राज्य प्रशासन पूरी ताकत से राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है।
मचैल माता यात्रा के श्रद्धालु भी संकट में
इस प्राकृतिक आपदा का असर मचैल माता यात्रा पर भी पड़ा है, जो चिनाब नदी के पास स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। हजारों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल थे, और कई तीर्थयात्री भी इस संकट की चपेट में आ गए। यात्रा को फिलहाल रोक दिया गया है, ताकि राहत और बचाव कार्य प्राथमिकता से किया जा सके।
मुख्यमंत्री का किश्तवाड़ दौरा, प्रधानमंत्री ने भी जताई चिंता
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार, 8 अगस्त 2025, को किश्तवाड़ का दौरा करने का ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि राज्य प्रशासन पूरी ताकत से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर गहरी चिंता जताई और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री ने रेस्क्यू अभियान की जानकारी ली और राहत कार्यों में हर संभव मदद की बात कही।
सुरक्षा और बचाव कार्य: हेलिकॉप्टर और ड्रोन से की जा रही निगरानी
अब तक के राहत कार्यों में सेना और राहत एजेंसियों का सहयोग अहम रहा है। हेलिकॉप्टर और ड्रोन की मदद से उन क्षेत्रों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, जो सड़क मार्ग से असंभव हैं। भारी बारिश और उफनती नदी के कारण कई इलाकों तक पहुंचना बहुत कठिन हो गया है। इस स्थिति में हेलिकॉप्टर और ड्रोन से स्थिति की निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी स्थान पर फंसे लोगों को जल्दी से सुरक्षित निकाला जा सके।
तस्वीरों में बयां हो रही तबाही: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें दिख रहा है कि कैसे मलबे और गाद से भरी पानी ने पूरे गांव को समतल कर दिया। स्थानीय लोग अपनी जान बचाकर जान बचाने के लिए भाग रहे थे, लेकिन तबाही इतनी भारी थी कि लोगों के पास भागने का समय भी नहीं मिला।
वीडियो और तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे क्षेत्र को खंडहर में तब्दील कर दिया।
अभी भी लापता दर्जनों लोग, परिजनों में घबराहट
अभी भी दर्जनों लोग लापता हैं और उनके परिजन अस्पतालों और राहत शिविरों में अपने प्रियजनों की तलाश में भटक रहे हैं। लोगों की आंखों में आंसू और दिलों में डर साफ झलक रहा है। उनके चेहरों पर बेचैनी और उदासी की झलक दिखाई दे रही है।
सेना और राहत एजेंसियों का कहना है कि बचाव अभियान लगातार जारी है, और राहत कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
किश्तवाड़ की तबाही: एक कठिन समय
यह प्राकृतिक आपदा किश्तवाड़ के लोगों के लिए बेहद कठिन समय साबित हो रही है। नदियों का उफान, मलबे में दबे घर, आसपास की बर्बादी और लापता लोगों की तलाश ने इस क्षेत्र को एक बड़ी त्रासदी में बदल दिया है।
सभी बचाव दल अपने प्रयासों को जारी रखते हुए इस आपदा के घायलों और मृतकों की संख्या में और इजाफा न होने देने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
निष्कर्ष: उम्मीद की किरण
हालांकि तबाही के इस मंजर में घबराहट और चिंता का माहौल है, लेकिन सेना और राहत दलों के जवान अपनी जान की परवाह किए बिना मलबे में दबे लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया है और बचाव कार्य लगातार जारी है। उम्मीद की जाती है कि आने वाले समय में और भी लोगों को सुरक्षित निकाला जाएगा और इस त्रासदी में कुछ राहत मिल सकेगी।

