राजवीर सिंह चौहान की तेरहवीं के दौरान मां विजय लक्ष्मी को आया दिल का दौरा, अस्पताल में हुई मौत
जयपुर परिवार पर टूटा दोहरा दुख
केदारनाथ हेलीकॉप्टर क्रैश हादसे में जान गंवाने वाले जयपुर के पायलट राजवीर सिंह चौहान के परिवार पर एक और बड़ा दुख टूट पड़ा है। अपने जवान बेटे की तेरहवीं के दिन मां विजय लक्ष्मी चौहान की भी अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई। यह घटना परिवार और रिश्तेदारों के लिए बेहद भावुक और पीड़ादायक रही।
तेरहवीं की रस्म के दौरान आया दिल का दौरा
राजवीर की तेरहवीं पर अंतिम रस्म अदायगी चल रही थी। मां विजय लक्ष्मी सुबह जल्दी उठकर ब्राह्मण भोज की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने अपने हाथों से खाना बनाया और आने वाले रिश्तेदारों का स्वागत किया। जैसे ही बीकानेर से कुछ परिजन पहुंचे, विजय लक्ष्मी भावुक हो गईं और बेटे की याद में जोर-जोर से रोने लगीं।
इसी दौरान उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और वे बेहोश होकर गिर गईं। परिवार के लोग उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर भागे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पायलट राजवीर सिंह की दुर्घटना में हुई थी मौत
राजवीर सिंह चौहान केदारनाथ में हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में सेवा दे रहे थे। कुछ दिन पहले हुए हेलीकॉप्टर क्रैश में राजवीर समेत कुछ और लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे से पूरा परिवार टूट गया था। बेटे की असामयिक मौत ने मां को अंदर से झकझोर दिया था, और आखिरकार वही दुख उनके जीवन का अंत भी बन गया।
परिवार और दोस्तों में शोक की लहर
राजवीर के करीबी दोस्त सूरज ने बताया कि हादसे के बाद से पूरा परिवार बेहद टूट चुका था। “विजय लक्ष्मी आंटी बेटे के जाने के बाद लगभग हर दिन रोती थीं। शनिवार को जैसे-तैसे हिम्मत करके तेरहवीं की रस्म कर रही थीं, लेकिन शायद दिल उस पीड़ा को सहन नहीं कर पाया,” सूरज ने कहा।
सूरज ने आगे बताया कि विजय लक्ष्मी जी ने ब्राह्मण भोज के लिए हर चीज खुद तैयार की थी और जैसे ही बेटे की यादें ताजा हुईं, वे खुद को संभाल नहीं पाईं।
समाज में भी शोक और संवेदना
इस दुखद घटना से न केवल परिवार बल्कि समाज के लोगों में भी शोक की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर राजवीर और उनकी मां विजय लक्ष्मी को श्रद्धांजलि देने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी परिवार के प्रति संवेदना जताई है।
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निष्कर्ष: एक दर्दनाक पारिवारिक त्रासदी
पायलट बेटे की असामयिक मौत और मां की भावनात्मक टूटन ने पूरे परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है। यह घटना इस बात की गवाह है कि भावनात्मक सदमे कभी-कभी शारीरिक रूप से भी घातक साबित हो सकते हैं। विजय लक्ष्मी चौहान का अपने बेटे के बिना जीना शायद मुमकिन नहीं था, और उसी पीड़ा ने उन्हें हमसे छीन लिया।