कोटा में स्कूल भवन निर्माण में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने विजिलेंस जांच के दिए आदेश

कोटा (राजस्थान): कोटा जिले के सांगोद विधानसभा क्षेत्र में सरकारी स्कूलों के भवन निर्माण में भारी भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस जांच के आदेश जारी किए हैं। मंत्री ने कहा कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।


सांगोद के सरकारी स्कूलों में निर्माण कार्यों में गड़बड़ी

पिछले कुछ वर्षों में सांगोद क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों में करोड़ों रुपये की लागत से भवनों का निर्माण किया गया। लेकिन अब वही इमारतें सिर्फ 5 से 7 साल में जर्जर हो चुकी हैं। ऊर्जा मंत्री नागर ने बताया कि इन स्कूलों के निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग हुआ है और कई स्थानों पर नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई।

उन्होंने जिला कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि PWD को नोडल एजेंसी बनाकर एक विशेष विजिलेंस टीम गठित की जाए, जो सभी स्कूल भवन निर्माण की जांच करेगी।


₹38 लाख के स्कूल भवन की जांच में खुली पोल

ऊर्जा मंत्री ने हाल ही में सांगोद क्षेत्र के कई गांवों — उरना, नरसिंहपुरा, खोदियाखेड़ी, खजूरना, मोहनपुरा, कोटबावड़ी, किशोरपुरा, लाडपुरा, बंजारा बस्ती, जुगलपुरा और गोपालपुरा — का दौरा किया।

खजूरना गांव में उन्होंने एक स्कूल भवन का निरीक्षण किया, जो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अनुशंसा पर पावर ग्रिड के CSR फंड से करीब ₹38 लाख की लागत से बन रहा था।

निरीक्षण में सामने आया कि पुराने स्कूल का फर्श एक फीट तक धंस चुका था और जब उसे खोला गया तो पाया गया कि सीमेंट का प्रयोग ही नहीं किया गया था। वहीं, नए भवन के कॉलम में सीमेंट-कंक्रीट (CC) की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई और फ्लोर में दरारें स्पष्ट रूप से दिखाई दीं।

मंत्री नागर ने मौके पर ही ठेकेदार को फटकार लगाई और काम तत्काल रोकने के निर्देश दिए।


4 इंच की छत और कमजोर सरिया: खुला भ्रष्टाचार का मामला

मंत्री ने उरना गांव के स्कूल का निरीक्षण करते हुए पाया कि वहां की छत टूटने की स्थिति में है। जांच के दौरान सामने आया कि जहां 6 इंच की स्लैब डाली जानी थी, वहां केवल 4 इंच की छत बनाई गई थी। साथ ही, 12 एमएम की जगह 8 एमएम के सरिए का इस्तेमाल किया गया था।

मंत्री नागर ने कहा, “यह साफ तौर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का उदाहरण है। सरकारी पैसे से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।”


विजिलेंस जांच टीम करेगी गहन पड़ताल

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि विजिलेंस टीम तकनीकी और वित्तीय स्तर पर जांच करेगी। जांच में यह देखा जाएगा कि किन ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से ये घटिया निर्माण हुए।

उन्होंने कहा, “सरकारी धन से बच्चों का भविष्य नहीं, भवनों का मलबा बनाया गया है। अब जवाबदेही तय होगी और दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।”


सरकारी धन की बर्बादी पर मंत्री का सख्त रुख

मंत्री नागर ने बताया कि कई गांवों में ऐसे स्कूल हैं जहां इमारतें खस्ताहाल हैं और बच्चे बाहर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं, जबकि भवनों के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसी तरह, आंगनबाड़ी भवनों में भी घटिया निर्माण और अनियमितताओं के मामले सामने आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अब जिले में सभी पुराने निर्माण कार्यों की पुनः जांच की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित ठेकेदारों, इंजीनियरों और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।


निष्कर्ष: अब होगी सख्त कार्रवाई

कोटा के सांगोद क्षेत्र में सरकारी स्कूल भवनों के निर्माण में भ्रष्टाचार का खुलासा एक बड़ा मामला है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने विजिलेंस जांच का आदेश देकर यह साफ कर दिया है कि सरकारी परियोजनाओं में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी

जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ न केवल अनुशासनात्मक बल्कि कानूनी कार्रवाई भी तय मानी जा रही है।

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