गैंगरेप मामले में कड़ी कार्रवाई, मनोजीत मिश्रा अब राज्य की किसी भी अदालत में नहीं कर पाएगा वकालत
कोलकाता | 3 जुलाई 2025
कोलकाता के कसबा गैंगरेप केस में आरोपी वकील मनोजीत मिश्रा पर बड़ी कार्रवाई हुई है। पश्चिम बंगाल बार काउंसिल ने उसे अपनी सदस्यता से निष्कासित कर दिया है और उसका वकालत का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। अब वह राज्य की किसी भी अदालत में वकालत नहीं कर सकेगा।
इस मामले ने राज्यभर में आक्रोश पैदा कर दिया है, और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग तेज हो गई है।
7 दिन के भीतर लिया गया फैसला
बार काउंसिल ने यह सख्त फैसला शिकायत दर्ज होने के केवल 7 दिन बाद सुनाया। बुधवार को हुई काउंसिल की विशेष बैठक में निर्णय लिया गया कि मिश्रा का नाम वकीलों की आधिकारिक सूची से हटा दिया जाए। यह निर्णय सेंट्रल बार काउंसिल को भी भेजा जाएगा, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर भी उसका वकालत करने का अधिकार समाप्त किया जा सके।
कसबा गैंगरेप केस: क्या है मामला?
यह मामला दक्षिण कोलकाता लॉ कॉलेज की एक छात्रा से कथित गैंगरेप का है, जिसमें मनोजीत मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि कॉलेज परिसर के बाहर उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
गौर करने वाली बात यह है कि मिश्रा के खिलाफ पहले से भी कई शिकायतें दर्ज थीं, इसके बावजूद वह अलीपुर कोर्ट में सक्रिय रूप से वकालत कर रहा था।
कॉलेज से निष्कासन और राजनीतिक लिंक
मनोजीत मिश्रा का संबंध तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (TMCP) से भी बताया जा रहा है। घटना सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने उसे तत्काल कॉलेज से निष्कासित कर दिया है। साथ ही, मामले में शामिल दो अन्य छात्र आरोपियों को भी कॉलेज से बाहर कर दिया गया है।
कॉलेज प्रशासन ने एक बयान में कहा कि,
“कॉलेज परिसर में किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कॉलेज की गरिमा बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है।”
लाइसेंस रद्द होने का क्या मतलब है?
बार काउंसिल द्वारा वकालत का लाइसेंस रद्द किए जाने का अर्थ है कि अब मनोजीत मिश्रा:
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किसी भी अदालत में वकील के रूप में पेश नहीं हो सकता
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कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता
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किसी मुवक्किल का कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश भर में कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस फैसले को कानूनी बिरादरी में सख्त लेकिन जरूरी कदम माना जा रहा है।
जनता में आक्रोश, न्याय की मांग तेज
घटना के सामने आने के बाद कोलकाता सहित पूरे राज्य में जनता का गुस्सा साफ देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर #JusticeForKolkataVictim ट्रेंड कर रहा है और लोग आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं।
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निष्कर्ष: सख्त कानून व्यवस्था की ज़रूरत
कोलकाता गैंगरेप केस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चाहे व्यक्ति किसी भी पेशे या राजनीतिक संगठन से जुड़ा हो, अगर वह अपराध में शामिल है तो कानून को अपना काम करना चाहिए। बार काउंसिल का यह फैसला न्याय की दिशा में एक प्रभावशाली कदम माना जा रहा है।