एयर इंडिया का बड़ा विवाद: ब्रिटेन की चेतावनी को अनदेखा किया गया?
CAA की चेतावनी: क्या एयर इंडिया ने इसे नजरअंदाज किया?
ब्रिटेन की सिविल एविएशन अथॉरिटी (CAA) ने 15 मई 2025 को एक सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया था, जिसमें बोइंग के कुछ विमानों में लगे फ्यूल शटऑफ वॉल्व एक्टुएटर को लेकर चिंता जताई गई थी। चेतावनी में कहा गया था कि इन एक्टुएटर्स में संभावित तकनीकी समस्या हो सकती है, जिससे विमान की सुरक्षा पर खतरा मंडरा सकता है। ब्रिटेन ने एयरलाइन ऑपरेटरों को निर्देश दिया कि वे FAA के एयरवर्थीनेस डायरेक्टिव (AD) की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि यह उनके विमानों पर लागू होता है या नहीं।
यह चेतावनी बोइंग 737, 757, 767, 777 और 787 मॉडल्स पर लागू थी। CAA ने एयरलाइनों को इन विमानों के फ्यूल शटऑफ वॉल्व एक्टुएटर की जांच, परीक्षण या बदलाव करने का आदेश दिया था। हालांकि, एयर इंडिया ने इसे एक सलाह मानते हुए इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
एयर इंडिया की प्रतिक्रिया: क्या यह सिर्फ एक सलाह थी?
एयर इंडिया का कहना है कि यह अलर्ट FAA द्वारा 2018 में जारी एक विशेष एयरवर्थीनेस सूचना बुलेटिन (SAIB) था, जिसे अनिवार्य नहीं माना गया था। एयर इंडिया के अनुसार, SAIB सिर्फ एक सलाह थी, और इसके अनुसार जांच करना जरूरी नहीं था। इस कारण से एयर इंडिया ने फ्यूल कंट्रोल स्विच की जांच नहीं कराई।
AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन बोर्ड) की शुरुआती रिपोर्ट में भी यह जानकारी दी गई कि एयर इंडिया ने इस जांच को इसलिए नहीं कराया क्योंकि इसे सिर्फ एक सलाह के रूप में लिया गया था, जबकि यह अनिवार्य नहीं था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि VT-ANB विमान पर 2019 और 2023 में थ्रॉटल कंट्रोल मॉड्यूल बदला गया, लेकिन यह बदलाव फ्यूल कंट्रोल स्विच से संबंधित नहीं था।
क्या एयर इंडिया को CAA की चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए था?
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या एयर इंडिया को CAA की सुरक्षा चेतावनी को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए था? CAA की चेतावनी को पूरी तरह से अनदेखा करना क्या उचित था, खासकर तब जब यह ऑपरेटरों के लिए स्पष्ट रूप से एक्शन योग्य थी? रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2023 के बाद से VT-ANB विमान में फ्यूल कंट्रोल स्विच से जुड़ी कोई खराबी दर्ज नहीं हुई थी, लेकिन क्या यह सुरक्षा के मानकों को पूरा करता था?
FAA के एयरवर्थीनेस डायरेक्टिव और एयर इंडिया की स्थिति
FAA द्वारा जारी एयरवर्थीनेस डायरेक्टिव (AD) ने इस तकनीकी खामी के बारे में पहले ही चेतावनी दी थी, जो फ्यूल कंट्रोल स्विच के सही संचालन से जुड़ी थी। इसे ध्यान में रखते हुए एयर इंडिया को अपनी सुरक्षा प्रक्रियाओं को सख्त करना चाहिए था। लेकिन एयर इंडिया ने इसे सिर्फ एक सलाह मानते हुए इसे लागू नहीं किया।
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सुरक्षा की दिशा में गंभीर सवाल
यह घटनाक्रम भारतीय नागरिक उड्डयन के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। एयर इंडिया के इस मामले को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या एयरलाइनों को ऐसी सुरक्षा चेतावनियों को हमेशा गंभीरता से लेना चाहिए, चाहे वह सिर्फ एक सलाह हो या अनिवार्य निर्देश। ऐसे हादसों से न केवल एयरलाइनों की छवि प्रभावित होती है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी सवालों के घेरे में आ जाती है।
निष्कर्ष
एयर इंडिया के बोइंग 787-8 विमान का हादसा और ब्रिटेन की CAA की सुरक्षा चेतावनी के बीच का संबंध भारतीय उड्डयन क्षेत्र के लिए एक बड़ा सबक हो सकता है। एयर इंडिया को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में सुरक्षा संबंधी सभी चेतावनियों को गंभीरता से लिया जाए, चाहे वे सलाह के रूप में हों या अनिवार्य निर्देशों के रूप में।

