क्या गृह मंत्रालय देने के बाद भी नीतीश कुमार के हाथ में है सत्ता का रिमोट? क्यों सम्राट चौधरी की पावर को अधूरा माना जा रहा

क्या गृह मंत्रालय मिलने के बाद भी सम्राट चौधरी को पूरा अधिकार मिला है?

बिहार में नई सत्ता समीकरण का आगाज़

बिहार में एनडीए सरकार के गठन के बाद मंत्रालयों का बंटवारा सामने आया है। इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जेडीयू के मुकाबले बीजेपी न सिर्फ संख्या में बड़ी साझेदार बनी, बल्कि सत्ता के कई महत्वपूर्ण विभाग भी उसके हाथ में गए हैं।
सबसे अहम बात— 20 साल में पहली बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गृह विभाग अपने पास नहीं रखा और इसे बीजेपी के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को सौंप दिया।

लेकिन सवाल यह है— क्या गृह मंत्रालय मिलने के बाद भी सम्राट चौधरी को पूरा अधिकार मिला है?
राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि गृह विभाग देने के बावजूद नीतीश कुमार ने मुख्य नियंत्रण अपने पास ही रखा है


बीजेपी की बढ़ी ताकत लेकिन पावर शिफ्ट अधूरा?

2024 के चुनाव के बाद बने समीकरणों में बीजेपी 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसी के बाद कैबिनेट में पावर का झुकाव भी बीजेपी की ओर दिखा।

  • जेडीयू से दो गुना अधिक मंत्री बीजेपी कोटे से बने

  • पहली बार जेडीयू ने गृह मंत्रालय बीजेपी को सौंपा

  • सम्राट चौधरी को प्रदेश की कानून व्यवस्था की कमान मिली

लेकिन पावर का संतुलन अब भी नीतीश कुमार की ओर झुका दिखता है।


सम्राट को गृह मंत्रालय मिला, पर नियंत्रण क्यों माना जा रहा अधूरा?

गृह मंत्री होने के नाते सम्राट चौधरी के पास कानून व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और सुरक्षा मामलों की सीधी जिम्मेदारी है।
उनका राजनीतिक कद निस्संदेह बड़ा हुआ है, लेकिन एक बड़ा तथ्य तस्वीर बदल देता है—

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) नीतीश कुमार ने अपने पास रखा है।

GAD वह विभाग है जहां—

  • IAS/IPS अधिकारियों की नियुक्ति

  • तबादले-पोस्टिंग

  • प्रमोशन

  • अनुशासनात्मक कार्रवाई

—जैसे सभी प्रशासनिक फैसले होते हैं।

यानी, पुलिस और प्रशासनिक ढांचे पर अंतिम नियंत्रण सीएम के हाथ में ही है।
इसी कारण राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सम्राट की पावर अभी “पूर्ण” नहीं मानी जा सकती।


सम्राट चौधरी के सामने तीन बड़ी चुनौतियां

बिहार में गृह विभाग सबसे कठिन और संवेदनशील माना जाता है। नीतीश कुमार इसी मंत्रालय के सहारे “सुशासन बाबू” की छवि बनाने में सफल हुए थे।

अब वही चुनौती सम्राट चौधरी के सामने है—

1. अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था में सुधार

बिहार में लगातार बढ़ते अपराधों पर बीजेपी जनता की अपेक्षाओं के दबाव में है। इस मंत्रालय के प्रदर्शन पर ही उसका भविष्य टिका है।

2. अपनी नेतृत्व क्षमता साबित करना

यदि सम्राट चौधरी सफल होते हैं, तो वे बीजेपी के संभावित मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में उभर सकते हैं।

3. प्रशासन पर सीमित नियंत्रण में काम करना

GAD नीतीश के पास होने से, पुलिस-प्रशासनिक फैसले लेने में उन्हें कम स्वतंत्रता मिलेगी।


क्या नीतीश ने अपनी पोज़िशन सुरक्षित रखने की रणनीति अपनाई?

विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार ने गृह मंत्रालय बीजेपी को देकर जवाबदेही का भार स्थानांतरित कर दिया है।

  • कानून व्यवस्था बिगड़ी → विपक्ष का निशाना बीजेपी पर

  • प्रशंसा मिली → सरकार का फायदा

साथ ही, GAD अपने पास रखकर नीतीश कुमार ने राज्य प्रशासनिक ढांचे पर पकड़ बनाए रखी है, जिससे सत्ता संतुलन उनके पक्ष में रहता है।


बिहार में बीजेपी की बड़ी रणनीति

बिहार ऐसा राज्य है जहां बीजेपी अभी तक अपना मुख्यमंत्री नहीं बना पाई है।
89 सीटों के साथ पहली बार वह सत्ता के केंद्र में है और धीरे-धीरे मुख्यमंत्री चेहरा तैयार करने की योजना पर काम कर रही है

सम्राट चौधरी को—

  • डिप्टी सीएम

  • गृह मंत्री

बनाकर बीजेपी भविष्य के विकल्प पर निवेश कर रही है।

दूसरी ओर, नीतीश कुमार की सरकार में बीजेपी के सबसे ज्यादा 14 मंत्री हैं, जबकि जेडीयू के केवल 8। यह भी दिखाता है कि सत्ता का झुकाव धीरे-धीरे किस ओर जा रहा है।


निष्कर्ष: सत्ता का रिमोट अभी भी नीतीश के पास

गृह मंत्रालय बीजेपी के पास है, लेकिन प्रशासनिक नियंत्रण सीएम नीतीश कुमार के हाथ में।
यानी, पावर शिफ्ट तो हुआ है, पर अधूरा।
अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि सम्राट चौधरी कानून-व्यवस्था में कितनी सफलता हासिल करते हैं, क्योंकि यही बिहार की राजनीति की अगली दिशा तय करेगा।

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