नई दिल्ली/तेहरान:
यूएई के पास इंटरनेशनल वाटर में एक ऑयल टैंकर को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) द्वारा जब्त किए जाने का मामला अब गंभीर मानवीय संकट बन चुका है। इस घटना में 16 भारतीय समेत कुल 18 क्रू मेंबर्स को हिरासत में लिया गया, जिनमें से 10 भारतीय नाविकों को ईरान की जेल भेज दिया गया है। बीते डेढ़ महीने से परिवार अनिश्चितता और डर में जी रहे हैं और अब उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
यह घटना 8 दिसंबर 2025 की दोपहर की है। दुबई स्थित कंपनी ग्लोरी इंटरनेशनल FZ LLC द्वारा संचालित टैंकर वैलेंट रोर यूएई के डिब्बा पोर्ट के पास इंटरनेशनल वाटर में था। जहाज तकनीकी मदद के लिए खोर फक्कन की ओर बढ़ रहा था, तभी ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने उसका पीछा शुरू कर दिया।
टैंकर के कमांडर ने घबराहट में अपने भाई कैप्टन विनोद परमार को फोन कर बताया कि ईरानी नौसेना उनका पीछा कर रही है। कुछ ही देर में फोन कट गया। इसके बाद कथित तौर पर बिना चेतावनी गोलीबारी हुई और जहाज को जब्त कर लिया गया।
गोलीबारी, हमला और जहाज पर कब्जा
परिजनों के अनुसार, गोलीबारी में जहाज को नुकसान पहुंचा और कुछ क्रू मेंबर्स घायल हुए। इसके बाद ईरानी जवान जहाज पर चढ़ आए, क्रू के साथ मारपीट की और सभी को बंधक बना लिया। ईरान ने आरोप लगाया कि जहाज छह मिलियन लीटर डीजल की तस्करी कर रहा था, जबकि जहाज प्रबंधन का कहना है कि उसमें केवल VLSFO (लो सल्फर फ्यूल ऑयल) मौजूद था।
टैंकर को ओमान की खाड़ी के पास ईरान के बंदर-ए-जास्क पोर्ट ले जाया गया।
एक कमरे में कैद, फोन जब्त
सभी 18 क्रू मेंबर्स को जहाज के एक कमरे में बंद कर दिया गया। मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर लिए गए। केवल जहाज के कैप्टन को रोज कुछ मिनट बात करने की अनुमति थी। परिवारों का आरोप है कि अब तक कोई आधिकारिक गिरफ्तारी आदेश या स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
10 भारतीय नाविक जेल भेजे गए
6 जनवरी 2026 को हालात और बिगड़ गए, जब 18 में से 10 क्रू मेंबर्स को बयान के बहाने जहाज से उतारकर बंदर अब्बास ले जाया गया और बाद में जेल भेज दिया गया। इनमें भारतीय चीफ ऑफिसर अनिल कुमार सिंह समेत कई इंजीनियर शामिल हैं।
अनिल सिंह की पत्नी गायत्री ने बताया कि उन्हें आखिरी बार एक मिनट का फोन आया था, जिसमें उनके पति ने जेल भेजे जाने की जानकारी दी।
परिवारों की गुहार, हाई कोर्ट का रुख
परिवारों का कहना है कि उन्होंने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग, विदेश मंत्रालय और ईरान स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया, लेकिन ठोस मदद नहीं मिली। इंटरनेट बंद होने और ईरान में जारी राजनीतिक अशांति ने स्थिति और गंभीर बना दी।
अब परिजनों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
खाने-पानी की कमी और बढ़ता तनाव
जहाज पर बचे आठ क्रू मेंबर्स की हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है। उनके पास सीमित राशन बचा है और मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। परिवारों को डर है कि ईरान में बढ़ते तनाव का असर उनके अपनों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
सरकार से उम्मीद
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों की वापसी के प्रयास किए जाएंगे। पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि उनके पति और बेटे जल्द सुरक्षित भारत लौटेंगे।
One thought on “खुले समंदर में खौफ: ईरान में फंसे 16 भारतीय नाविक, गोलीबारी से गिरफ्तारी तक दर्दनाक कहानी”