गंगा-यमुना उफान पर, कई गांव जलमग्न, पलायन करने को मजबूर लोग, बाढ़ से उत्तर भारत में हालात गंभीर

गंगा-यमुना उफान पर, कई गांव जलमग्न, पलायन करने को मजबूर लोग

उत्तर भारत के कई राज्यों में बाढ़ का कहर, प्रशासन राहत कार्यों में जुटा, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की कोशिशें जारी


उत्तर भारत में बाढ़ का प्रकोप, कई राज्य प्रभावित

उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। गंगा और यमुना जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में बाढ़ के कारण गांव जलमग्न हो गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि लोग अपने घरबार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।

प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया है और प्रभावित इलाकों में अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं। लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। आइए जानते हैं भरतपुर (राजस्थान), ऊधम सिंह नगर (उत्तराखंड), कानपुर (उत्तर प्रदेश), प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) और ग्वालियर (मध्य प्रदेश) से आई ग्राउंड रिपोर्ट।


ऊधम सिंह नगर: रेबड़ा नदी का जलस्तर बढ़ा, बाढ़ से बाजपुर प्रभावित

ऊधम सिंह नगर जिले में लगातार हो रही बारिश के बाद रेबड़ा नदी का जलस्तर सामान्य से ऊपर पहुंच गया है, जिसके कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। बाजपुर क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां लोगों के घरों में पानी घुस चुका है और नैनीताल जाने वाला मुख्य मार्ग अवरुद्ध हो गया है।

इस दौरान 11 वर्षीय बच्चे की डूबने से मौत हो गई। प्रशासन और SDRF की टीमें प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हुई हैं। राहत शिविरों में भोजन और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था की गई है।

स्थानीय अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे बाहर न निकलें और केवल जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर जाएं। बाढ़ के बाद नुकसान का आकलन किया जा रहा है, और दीर्घकालिक समाधान पर विचार किया जा रहा है।


कानपुर: टूटी सड़क पर समाजवादी पार्टी का विरोध प्रदर्शन

कानपुर में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। रामगोपाल चौराहा से आनंद साउथ सिटी तक की सड़क लंबे समय से टूटी हुई है, और बरसात में इसमें जलभराव हो जाता है। लोगों को आए दिन गिरने का खतरा बना रहता है। प्रशासन द्वारा इस मुद्दे पर कोई कदम नहीं उठाए जाने से समाजवादी पार्टी के पार्षद अर्पित ने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सड़क पर धान रोपकर विरोध प्रदर्शन किया।

इससे पहले, एक लड़की इसी सड़क पर गिर गई थी, और उसके पिता ने विरोध स्वरूप पानी में लेटकर प्रदर्शन किया था। इस समस्या के समाधान के लिए जल्द कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि लोग सुरक्षित रूप से सड़क का उपयोग कर सकें।


प्रयागराज: संपर्क मार्ग डूबे, 23 नावें तैनात

प्रयागराज जिले में बाढ़ के कारण गांवों का संपर्क मुख्य शहर से कट चुका है। ग्यारापुर-झूंसी मार्ग पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है, जिससे बदरा, सोनौटी, ढोलबजवा और पुरवा जैसे गांवों का संपर्क शहर से टूट गया है। लोग नावों से साइकिल और बाइक पार कर रहे हैं, और बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं

इस संकट के दौरान 23 नावें तैनात की गई हैं, जिनके जरिए राशन, दूध, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान गांवों में भेजे जा रहे हैं। बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई है, और मरीजों को नाव से अस्पताल भेजना पड़ रहा है। छोटा बघाड़ा क्षेत्र में बाढ़ का पानी गलियों तक भर चुका है, और लोग कमर तक पानी में चलकर अपने घरों का सामान बचा रहे हैं। कई मंदिर, गाड़ियां और मकान बाढ़ में डूब गए हैं।


राजस्थान: भरतपुर में बाढ़ की स्थिति और नदियों का उफान

राजस्थान के भरतपुर जिले में भी बाढ़ के कारण हालात गंभीर हैं। यहां गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे कई गांवों में पानी घुस गया है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को तेज कर दिया है और कई राहत शिविरों में लोगों को आश्रय दिया गया है।

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निष्कर्ष: बाढ़ की स्थिति और राहत कार्य

उत्तर भारत के कई राज्यों में बाढ़ के कारण स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। लोग पलायन कर रहे हैं और सरकार द्वारा राहत कार्यों में तेजी लाई जा रही है। प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद की जा रही है, लेकिन भारी बारिश और नदियों का उफान इस संकट को बढ़ा रहे हैं। सरकार और संबंधित विभागों को जलभराव, सड़कों की स्थिति और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय तक राहत देने के लिए और भी कदम उठाने होंगे।

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