गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश: गाजियाबाद में एक बड़ी ठगी का खुलासा हुआ है, जिसमें आरोपी हर्षवर्धन जैन ने खुद को काल्पनिक देशों का दूतावास चलाने वाला राजनयिक बताकर लोगों से लाखों रुपये ऐंठे। जैन की गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा की गई, और उसके पास से भारी मात्रा में नकदी, फर्जी पासपोर्ट, रबर स्टैंप, और लग्जरी गाड़ियां बरामद हुईं।
फर्जी दूतावास और काल्पनिक देशों के नाम पर ठगी
हर्षवर्धन जैन अपने किराए के मकान से पश्चिम आर्टिका, साबोर्गा, पौलविया, और लंदोनिया जैसे काल्पनिक देशों का दूतावास चलाता था। वह लोगों को विदेशों में नौकरी और व्यापार डील के नाम पर धोखा देकर पैसे ऐंठता था। इसके अलावा, वह खुद को इन काल्पनिक देशों का कॉन्सुल या एम्बेसडर बताता था। उसके ठगी के इस नेटवर्क ने सात साल तक लोगों को ठगा।
जैन के पास से क्या मिला?
एसटीएफ ने जैन को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 44.7 लाख रुपये नकद, 34 रबर स्टैंप, विदेशी मुद्रा, 12 फर्जी राजनयिक पासपोर्ट, 18 नकली डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट, और चार लग्जरी गाड़ियां जब्त कीं। यह बरामदगी उसकी ठगी के बड़े पैमाने को दर्शाती है।
चंद्रास्वामी और अदनान खशोगी से रिश्ते
पुलिस के अनुसार, हर्षवर्धन जैन का विवादित धर्मगुरु चंद्रास्वामी और अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्कर अदनान खशोगी से भी संपर्क था। साल 2011 में, जैन पर अवैध सैटेलाइट फोन रखने के आरोप में मामला दर्ज हुआ था। चंद्रास्वामी और खशोगी के साथ जैन के संबंध इस मामले को और जटिल बना रहे हैं, जिससे यह साबित होता है कि उसका नेटवर्क बेहद प्रभावशाली था।
फर्जी दस्तावेजों के साथ ठगी
जैन ने कई देशों के राजदूतों की फर्जी तस्वीरें और एडिट की हुई छवियां भी इस्तेमाल कीं। इसके जरिए वह लोगों को यह विश्वास दिलाता था कि वह उच्च स्तरीय संपर्कों वाला व्यक्ति है। उसके पास से फर्जी विदेश मंत्रालय की मुहर, प्रेस कार्ड, और विभिन्न देशों की सील भी बरामद की गई हैं।
हवाला कारोबार और दलाली का रैकेट
एसटीएफ के एसएसपी सुशील घुले ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि जैन का मुख्य उद्देश्य दलाली करना, विदेशों में नौकरी दिलाने का झूठा दावा करना और फर्जी कंपनियों के जरिए हवाला रैकेट चलाना था। वह फर्जी दूतावास के जरिए हवाला कारोबार का संचालन करता था और अपनी पहचान को एक राजनयिक के रूप में पेश करता था।
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नई एफआईआर और गिरफ्तारियां
2011 में पहले भी जैन पर कई मामले दर्ज हुए थे, और अब उसके खिलाफ नई एफआईआर भी दर्ज की गई है। एसटीएफ इंस्पेक्टर सचिन कुमार ने पीटीआई को बताया कि जैन के फर्जी दूतावास में इन देशों के झंडे भी लगाए जाते थे ताकि वह असली वाणिज्य दूतावास जैसा आभास दे सके।
निष्कर्ष
हर्षवर्धन जैन का फर्जी दूतावास चलाने और ठगी करने का यह मामला यह दर्शाता है कि कैसे लोग आम जनता को झूठे वादों और फर्जी पहचान के जरिए धोखा दे सकते हैं। पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद, इस मामले का पर्दाफाश हुआ, और जैन को गिरफ्तार किया गया। यह घटना समाज में बढ़ते साइबर अपराध और ठगी की गंभीरता को और उजागर करती है, और हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है।

