गुरदासपुर डबल मर्डर और रंजीत एनकाउंटर मामला: ISI साजिश या फर्जी मुठभेड़? जानें पूरी कहानी

गुरदासपुर डबल मर्डर और रंजीत एनकाउंटर मामला: ISI साजिश या फर्जी मुठभेड़?

प्रस्तावना

पंजाब के गुरदासपुर जिले के आदियां गांव में दो पुलिसकर्मियों की हत्या और 19 वर्षीय युवक रंजीत की एनकाउंटर में मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पंजाब पुलिस ने इस डबल मर्डर के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का हाथ बताया है। वहीं, गांव के लोग रंजीत की मौत को फर्जी मुठभेड़ करार दे रहे हैं और CBI जांच की मांग कर रहे हैं। यह मामला अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है।

क्या है गुरदासपुर डबल मर्डर मामला?

गुरदासपुर के आदियां गांव में स्थित एक छोटी पुलिस चौकी पर तैनात दो पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह चौकी पाकिस्तान सीमा से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चौकी की संरचना बेहद साधारण है—चार दीवारें और एक छत। यहां पंजाब पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान संयुक्त रूप से ड्यूटी करते हैं।

चौकी पर अलग-अलग शिफ्ट में तीन पंजाब पुलिस कर्मी और दो बीएसएफ जवान तैनात रहते हैं। चौकी का प्रभारी आमतौर पर पंजाब पुलिस का एक एएसआई (असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर) होता है, जबकि साथ में होमगार्ड के जवान भी मौजूद रहते हैं।

पुलिस का दावा: ISI की साजिश

पंजाब पुलिस ने दावा किया कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का हाथ है। पुलिस के अनुसार, इस साजिश में तीन स्थानीय युवकों—रंजीत, दिलावर और इंद्रजीत—को शामिल किया गया। पुलिस का कहना है कि इन युवकों को इस वारदात के लिए कथित तौर पर पैसे दिए गए थे।

हालांकि, पुलिस के बयान के मुताबिक, आरोपियों को अग्रिम के तौर पर सिर्फ एक-एक हजार रुपये दिए गए थे। इसी बिंदु पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या इतनी कम रकम में दो पुलिसकर्मियों की हत्या जैसी गंभीर वारदात को अंजाम दिया जा सकता है?

72 घंटे में केस सुलझाने का दावा

दो पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद पंजाब पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। कई टीमें गठित की गईं और 72 घंटे के भीतर केस सुलझाने का दावा किया गया। पुलिस के अनुसार, 24 फरवरी की शाम को रंजीत और दिलावर को गांव से हिरासत में लिया गया।

इसके बाद पुलिस ने बताया कि रंजीत को मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने भागने की कोशिश की और जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई।

रंजीत की मौत पर उठे सवाल

रंजीत की मौत के बाद गांव में तनाव का माहौल है। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि यह फर्जी एनकाउंटर था। उनका कहना है कि रंजीत को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका था, इसलिए मुठभेड़ की कहानी पर भरोसा करना मुश्किल है।

गांव वालों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए CBI जांच की अपील की है। उनका कहना है कि सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।

सुरक्षा और साजिश पर बड़ा सवाल

यह भी सवाल उठ रहा है कि अगर यह ISI की साजिश थी, तो क्या सिर्फ दो पुलिसकर्मियों की हत्या से राज्य में अस्थिरता फैलाने की योजना थी? सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, सीमा के पास स्थित चौकियों पर हमले का मकसद सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना हो सकता है।

हालांकि, स्थानीय लोग इस थ्योरी को संदेह की नजर से देख रहे हैं। उनका मानना है कि पूरी कहानी में कई कड़ियां अभी साफ नहीं हैं।

निष्कर्ष

गुरदासपुर डबल मर्डर और रंजीत एनकाउंटर मामला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है। एक तरफ पुलिस ISI साजिश की बात कर रही है, तो दूसरी ओर ग्रामीण फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगा रहे हैं।

सच्चाई क्या है, यह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। फिलहाल, यह मामला पंजाब की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर गंभीर बहस का कारण बना हुआ है।

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