उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना की साइट पर हुआ भूस्खलन, मजदूरों में अफरा-तफरी, राहत कार्य जारी
चमोली, 3 अगस्त 2025: उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में स्थित THDC के विष्णुगाड़ पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की डैम साइट पर शुक्रवार रात भारी भूस्खलन हुआ। इस हादसे में 12 मजदूर घायल हो गए। घटनास्थल पर करीब 200 मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें से कई ने समय रहते भागकर अपनी जान बचाई। हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है और घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
भूस्खलन का कारण और घटना का विवरण
पुलिस और अधिकारियों के अनुसार, हादसा हेलंग के पास स्थित विष्णुगाड़ पीपलकोटी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की डायवर्जन साइट पर हुआ। यहां निर्माण कार्य के दौरान अचानक पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा, जिससे आसपास काम कर रहे मजदूरों में हड़कंप मच गया। भूस्खलन की चपेट में आने से 12 मजदूर घायल हो गए, जबकि अन्य मजदूर भागकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे।
राहत और बचाव कार्य
घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत अब स्थिर है। राहत कार्य के लिए THDC और हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। जिला प्रशासन ने भी घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है, और पहाड़ी इलाकों में हो रहे भूस्खलन के कारण सुरक्षा उपायों पर पुनः विचार किया जा रहा है।
बारिश और भूस्खलन का संबंध
स्थानीय प्रशासन और विशेषज्ञों के अनुसार, चमोली जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। बारिश ने पहाड़ों में स्थित मिट्टी और चट्टानों को कमजोर कर दिया है, जिसके चलते इस प्रकार के हादसों का खतरा बढ़ गया है। हेलंग क्षेत्र में यह भूस्खलन बारिश के कारण हुआ था।
निर्माण परियोजनाओं की सुरक्षा पर सवाल
यह हादसा उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में चल रही निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करता है। पर्यावरणविदों का कहना है कि पहाड़ों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों से पर्यावरणीय संतुलन पर बुरा असर पड़ सकता है। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण स्थानीय लोग और मजदूर पहले से ही जोखिम भरे हालात में काम कर रहे हैं।
इस घटना के बाद से निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था और भूस्खलन से बचने के उपायों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह के हादसों से बचने के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है।
THDC और HCC की प्रतिक्रिया
टीएचडीसी और एचसीसी अधिकारियों ने घटना के बाद तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिए थे। THDC के प्रवक्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हम इस हादसे पर दुख व्यक्त करते हैं और घायलों की जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं। हम मामले की गहन जांच करेंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।”
निष्कर्ष
चमोली जिले में हुई यह भूस्खलन की घटना स्थानीय मजदूरों की सुरक्षा और पर्यावरणीय मुद्दों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण निर्माण कार्यों की सुरक्षा में खामियां सामने आ रही हैं, और इसके कारण भविष्य में और अधिक सावधानियों की आवश्यकता महसूस हो रही है। अब देखना यह होगा कि सरकारी और निजी संस्थान इस हादसे से सीख लेकर भविष्य में पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा के क्या उपाय अपनाते हैं।
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