40 लाख की फिरौती के बाद हुआ अपहरण और हत्या
चित्रकूट जिले में व्यापारी अशोक केसरवानी के बेटे आयुष केसरवानी का अपहरण और हत्या का मामला सामने आया। गुरुवार शाम आयुष के पिता को धमकी भरा फोन आया, जिसमें कहा गया, “तेरा बेटा आयुष केसरवानी किडनैप हो चुका है, 40 लाख फिरौती लेकर घाटी पर आ जा, ज्यादा होशियारी नहीं…”।
डरे-सहमे अशोक ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया और सीसीटीवी फुटेज खंगाले।
आयुष की लाश मिलने पर भड़का जनाक्रोश
कुछ ही घंटों बाद पुलिस को आयुष की लाश बरामद हुई। यह घटना इलाके में भारी आक्रोश का कारण बनी। सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए एसपी समेत आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। भीड़ को शांत करने के बाद जांच को आगे बढ़ाया गया।
अपराधियों की पहचान: पूर्व किरायेदार ही कातिल
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि अपराधी इरफान अंसारी और अकरम उर्फ़ कल्लू हैं। ये दोनों आयुष के पिता की किराए की दुकान में काम करते थे।
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कल्लू मिस्त्री के तौर पर काम करता था
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इरफान और कल्लू ने पिछले दिसंबर में दुकान खाली कर दी थी, जिससे आपसी रंजिश की संभावना थी
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आरोपी ने फोन पर 40 लाख की फिरौती की मांग भी की थी
कब्र में छिपाई लाश, फिरौती का खेल जारी
आयुष के पिता अशोक ने बताया कि इरफान और कल्लू उनके बगल में ही थे। उन्होंने उनके मूवमेंट की निगरानी की और बड़े बेटे के शक के बाद कमरे की तलाशी ली गई। इस दौरान बक्से में आयुष की लाश बरामद हुई।
पुलिस के अनुसार, संभव है कि पकड़े जाने के डर से आयुष की हत्या पहले कर दी गई थी, लेकिन फिरौती की मांग उसके बाद भी जारी रखी गई।
मुख्य आरोपी ढेर, दूसरा अस्पताल में
शुक्रवार तड़के पुलिस ने मुठभेड़ में मुख्य आरोपी कल्लू को ढेर कर दिया। वहीं इरफान गंभीर घायल हालत में अस्पताल में भर्ती है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपियों ने परिचय का फायदा उठाकर यह अमानवीय कृत्य अंजाम दिया।
आयुष इरफान को जानता था, इसलिए आसानी से उसके साथ चला गया। इसके बाद आरोपी ने शव को बक्से में छिपा दिया।
व्यापारी समुदाय में उभरा गुस्सा, सुरक्षा बढ़ाई गई
इस घटना के बाद चित्रकूट में व्यापारी समुदाय में भारी आक्रोश देखा गया। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए जिले भर की पुलिस को तैनात किया गया। वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में है और अला अधिकारी मौके पर नजर बनाए हुए हैं।
सामाजिक और कानूनी पहलू
यह घटना यह स्पष्ट करती है कि परिचित और भरोसेमंद दिखने वाले लोग भी अमानवीय अपराधों को अंजाम दे सकते हैं। पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने स्थिति को नियंत्रण में किया और आरोपियों को कानून के दायरे में लाया।

