दुर्ग के मदर टेरेसा स्कूल में अमानवीय घटना से फैला आक्रोश
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक घटना सामने आई है। बगडूमर गांव स्थित मदर टेरेसा इंग्लिश मीडियम स्कूल में एक साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची को स्कूल प्रिंसिपल ने सिर्फ इसलिए पीट दिया क्योंकि उसने ‘राधे-राधे’ बोलकर अभिवादन किया था। मामले ने धार्मिक असहिष्णुता और बाल अधिकारों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘राधे-राधे’ बोलने पर थप्पड़ और टेप से बंद किया गया मुंह
घटना बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे की है। बच्ची ने स्कूल में प्रवेश करते समय प्रिंसिपल एला ईवन कौलवीन को ‘राधे-राधे’ कहा। इसी बात से नाराज़ होकर प्रिंसिपल ने पहले बच्ची को थप्पड़ मारा और फिर उसके मुंह पर टेप चिपका दी। बच्ची के मुताबिक, करीब 15 मिनट तक टेप उसके मुंह पर चिपकी रही और उसे अन्य दंड भी दिए गए।
मासूम बच्ची रोते हुए घर पहुंची, शरीर पर दिखे चोट के निशान
स्कूल से लौटने के बाद बच्ची ने रोते हुए पूरी घटना अपने माता-पिता को बताई। जब माता-पिता ने उसके शरीर की जांच की तो कई स्थानों पर चोट के निशान भी दिखाई दिए। इस अमानवीय व्यवहार से आक्रोशित होकर परिजनों ने तुरंत नंदिनी थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर प्रिंसिपल को किया गिरफ्तार
बच्ची के पिता प्रवीण यादव की शिकायत के आधार पर पुलिस ने IPC की धारा 323 (मारपीट), 504 (जानबूझकर अपमान), 506 (धमकी) और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 व 82 के तहत केस दर्ज किया।
एडिशनल एसपी पद्मश्री तंवर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह साफ हुआ है कि प्रिंसिपल ने बच्ची को एक सवाल का जवाब न देने और कथित तौर पर धार्मिक अभिवादन करने पर शारीरिक दंड दिया, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य और अपराध की श्रेणी में आता है।
बजरंग दल ने की सख्त कार्रवाई की मांग, थाने पहुंचा विरोध जताने
घटना के बाद पूरे जिले में जन आक्रोश फैल गया। बजरंग दल के कार्यकर्ता थाने पहुंचे और इसे धार्मिक असहिष्णुता का मामला बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह घटना केवल एक बच्ची पर हमला नहीं, बल्कि समाज के मूल्यों पर भी प्रहार है।
शिक्षा विभाग भी करेगा स्वतंत्र जांच, स्कूल पर हो सकती है प्रशासनिक कार्रवाई
इस घटना को लेकर शिक्षा विभाग ने भी संज्ञान लिया है और स्वतंत्र जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बच्ची के साथ हुए दुर्व्यवहार को गंभीरता से लिया गया है और स्कूल प्रशासन के खिलाफ आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष: मासूम पर अत्याचार ने झकझोरा पूरा समाज
एक साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ हुई इस घटना ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हम अपने बच्चों के लिए कैसी शिक्षा व्यवस्था बना रहे हैं। ‘राधे-राधे’ जैसे शब्द पर दंड देना न केवल धार्मिक असहिष्णुता को दर्शाता है, बल्कि यह बाल अधिकारों और मानवता के भी विरुद्ध है।
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