भिलाई, छत्तीसगढ़: शराब घोटाले की जांच में नया मोड़
छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले की जांच अब और तेज़ हो गई है। शुक्रवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के भिलाई स्थित आवास पर छापा मारा। यह कार्रवाई आर्थिक अनियमितताओं और अवैध लेनदेन से जुड़ी जांच के तहत की गई।
तीन गाड़ियों में पहुंची ED, CRPF ने किया सुरक्षा घेरा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईडी की टीम सुबह करीब 6:30 बजे तीन गाड़ियों में चैतन्य बघेल के घर पहुंची। तलाशी के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों ने घर को चारों ओर से घेर रखा था। फिलहाल तलाशी जारी है और अधिकारियों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
असाधारण समय पर कार्रवाई
यह छापेमारी ऐसे समय हुई है जब छत्तीसगढ़ विधानसभा का अंतिम दिन चल रहा है। आमतौर पर भूपेश बघेल विधानसभा सत्र के दौरान रायपुर में रहते हैं, लेकिन इस बार वह भिलाई में ही मौजूद थे, जहां ईडी की टीम ने दस्तक दी।
पूर्व मुख्यमंत्री आज विधानसभा में रायगढ़ जिले में पेड़ कटाई के मुद्दे को उठाने वाले थे। इससे पहले उन्होंने क्षेत्र के ग्रामीणों से भी इस मुद्दे पर मुलाकात की थी।
शराब घोटाले की बढ़ती परतें
ईडी की यह कार्रवाई उसी शराब घोटाले से जुड़ी है, जिसमें पिछले कुछ वर्षों से जांच जारी है। इस घोटाले में राज्य के आबकारी विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हजारों करोड़ की आर्थिक अनियमितताओं के आरोप हैं।
7 जुलाई को राज्य की आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (EOW) ने इस मामले में चौथी पूरक चार्जशीट दाखिल की थी। जिसमें घोटाले की राशि को 2,161 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3,200 करोड़ रुपये कर दिया गया था। चार्जशीट के अनुसार, यह मामला एक संगठित और सुनियोजित घोटाले का हिस्सा है।
अब तक क्या हो चुका है?
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अब तक इस केस में 5 चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं।
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29 से अधिक आबकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल हैं।
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आरोप है कि अधिकारियों ने शराब व्यापारियों के साथ सांठगांठ कर राज्य सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान पहुंचाया।
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पहले की चार्जशीट में कई राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों के नाम भी सामने आए थे।
क्या कहती है ईडी की कार्रवाई?
ईडी द्वारा की गई यह छापेमारी एक स्पष्ट संकेत है कि जांच एजेंसियां अब सीधे राजनीतिक परिवारों तक पहुंच रही हैं। इससे पहले भी राज्य के कई बड़े अधिकारियों और कारोबारियों के यहां छापे पड़ चुके हैं। यह कार्रवाई संकेत देती है कि जांच केवल अफसरों तक सीमित नहीं रहेगी।
राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू
ईडी की कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज़ हो गई है। कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए राजनीति की आड़ ली जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पहले भी कहा था कि “ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल सत्ता में बैठे लोग अपने राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए कर रहे हैं।“
निष्कर्ष: जांच का अगला कदम क्या होगा?
शराब घोटाले की जांच जिस दिशा में बढ़ रही है, उससे साफ है कि अगली चार्जशीट में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। ईडी की इस ताज़ा कार्रवाई ने मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अगर जांच में चैतन्य बघेल की कोई भूमिका पाई जाती है, तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।
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