छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोपी चैतन्यानंद की गिरफ्तारी: पासवर्ड भूलने का बहाना और फरारी की दास्तान

पासवर्ड भूलने का बहाना और फरारी की दास्तान

दिल्ली पुलिस ने छात्राओं से यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में फरार चल रहे स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में चैतन्यानंद बार-बार पुलिस से कहता रहा कि वह अपने फोन का पासवर्ड भूल गया है और घबराहट महसूस कर रहा है। पुलिस को उसके पास से कई मोबाइल फोन, आईपैड और फर्जी दस्तावेज मिले हैं। जांच एजेंसियां अब उसके नेटवर्क और सहयोगियों की तलाश में जुटी हैं।


छात्राओं की शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई

6 अगस्त को दिल्ली स्थित श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट की 17 छात्राओं ने चैतन्यानंद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इनमें से अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की छात्राएं थीं। आरोप था कि चैतन्यानंद उन्हें रात में बुलाता, आपत्तिजनक संदेश भेजता और हॉस्टल व कैंपस की सीसीटीवी फुटेज तक एक्सेस करता था।

शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद ही वह दिल्ली छोड़कर फरार हो गया और लगातार पुलिस को चकमा देता रहा।


फरारी के दौरान होटलों में छिपता रहा

जांच में खुलासा हुआ कि चैतन्यानंद ने करीब 40 दिनों में 13 अलग-अलग होटल बदले। वह ज्यादातर वृंदावन, मथुरा और आगरा जैसे इलाकों के सस्ते होटलों में रुका, जहां सीसीटीवी कैमरे या तो लगे ही नहीं थे या फिर सही तरीके से काम नहीं कर रहे थे।

बुकिंग उसके चेले करवाते थे ताकि सीधा नाम सामने न आए। पुलिस का मानना है कि फरारी के दौरान भी वह छात्राओं की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। बरामद मोबाइल में कैंपस की लाइव सीसीटीवी एक्सेस मिली, जिससे साफ है कि वह हॉस्टल और कॉलेज पर लगातार नजर बनाए हुए था।


पासवर्ड भूलने का बहाना

पुलिस पूछताछ के दौरान चैतन्यानंद बार-बार कहता रहा कि उसे अपने फोन का पासवर्ड याद नहीं है और वह घबराहट में है। उसके पास से तीन मोबाइल फोन और एक आईपैड बरामद किया गया है, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। माना जा रहा है कि इन्हीं डिवाइसों में छात्राओं को भेजे गए आपत्तिजनक संदेश और चैट्स के अहम सबूत मौजूद हैं।


फर्जी पहचान और दो पासपोर्ट

गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उसके पास से दो पासपोर्ट मिले। एक में उसका नाम स्वामी पार्थ सारथी और दूसरे में स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती लिखा था। यही नहीं, दोनों पासपोर्ट में जन्मस्थान और माता-पिता के नाम भी अलग-अलग दर्ज थे।

उसके पास फर्जी पैन कार्ड और विजिटिंग कार्ड भी मिले हैं। इनमें से एक कार्ड पर उसने खुद को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) का स्थायी राजदूत और ब्रिक्स का विशेष दूत बताया था।


ताजगंज के होटल से आधी रात में गिरफ्तारी

पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि चैतन्यानंद आगरा के ताजगंज क्षेत्र के एक छोटे होटल में पार्थ सारथी नाम से ठहरा हुआ है। 27 सितंबर को उसने कमरा नंबर 101 बुक किया। होटल स्टाफ को शक हुआ क्योंकि वह कमरे से बाहर नहीं निकल रहा था।

28 सितंबर की सुबह करीब 3:30 बजे पुलिस ने होटल पर छापेमारी की और उसे दबोच लिया। मौके से तीन मोबाइल, आईपैड और कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए।


फरारी में भी चलता रहा षड्यंत्र

जांच में सामने आया है कि फरारी के दौरान उसने 50 लाख रुपये से ज्यादा नकद निकाला और अलग-अलग नामों से बैंक खाते संचालित किए। उसने अपने सहयोगियों को छात्राओं पर दबाव बनाने और उनके फोन से आपत्तिजनक संदेश डिलीट करवाने के लिए भी कहा। पुलिस को शक है कि उसके कई साथी अब भी फरार हैं।


पीड़िताओं को मिली राहत

चैतन्यानंद की गिरफ्तारी से पीड़ित छात्राओं को कुछ हद तक राहत मिली है। एक छात्रा की मित्र ने कहा कि यह सिर्फ “आधी जीत” है। असली न्याय तभी होगा जब उसे कड़ी सजा मिलेगी ताकि कोई और लड़कियों के साथ ऐसी हरकत करने की हिम्मत न कर सके।


पुलिस की आगे की रणनीति

फिलहाल चैतन्यानंद को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस की योजना है कि उसे उन महिला सहायिकाओं के सामने बैठाकर पूछताछ की जाए, जिन पर आरोप है कि उन्होंने छात्राओं को धमकाकर उसकी मदद की।

इसके अलावा, पुलिस उसे जल्द ही कॉलेज कैंपस भी ले जा सकती है ताकि घटनास्थल से और सबूत जुटाए जा सकें।


निष्कर्ष

चैतन्यानंद की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक चोले में छिपे ऐसे लोग समाज को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं। अब पूरा मामला अदालत में जाएगा और पीड़िताओं को उम्मीद है कि न्याय मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

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