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जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, दिल्ली के RML अस्पताल में ली अंतिम सांस

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार को निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे और लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। मलिक ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दोपहर करीब 1 बजे अंतिम सांस ली, जहां उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से राजनीति और प्रशासनिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

सत्यपाल मलिक का राजनीतिक सफर

सत्यपाल मलिक का राजनीतिक करियर बहुत ही विविधतापूर्ण और प्रभावशाली रहा। उनका जन्म 24 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसावदा गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मेरठ विश्वविद्यालय से हासिल की और छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में राजनीति में कदम रखा। मलिक का राजनीतिक करियर 1974 में उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य के रूप में शुरू हुआ और उन्होंने कई अहम पदों पर कार्य किया।

मलिक ने 1980 से 1986 तक राज्यसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया और बाद में 1989 से 1991 तक अलीगढ़ से लोकसभा के सदस्य के रूप में कार्य किया। इसके बाद वह 2004 में भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) में शामिल हो गए और बागपत से लोकसभा चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

जम्मू-कश्मीर राज्यपाल के रूप में कार्यकाल

सत्यपाल मलिक का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यकाल जम्मू-कश्मीर राज्य के राज्यपाल के रूप में रहा। वह अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के अंतिम राज्यपाल रहे। उनके कार्यकाल के दौरान 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया, जिससे जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया गया और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया।

यह फैसला भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ था और इसी दिन मलिक ने अंतिम सांस ली। इस संयोग ने उनके निधन को और भी ऐतिहासिक बना दिया।

सत्यपाल मलिक के बयान और कार्य

सत्यपाल मलिक का राजनीतिक दृष्टिकोण समय के साथ बदलता गया। जम्मू-कश्मीर राज्यपाल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठानी शुरू की। वह मोदी समर्थक से उनके कट्टर आलोचक बन गए। 2022 में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले घोषणा की कि वह रालोद और समाजवादी पार्टी (सपा) का समर्थन करेंगे, खासकर किसानों के मुद्दे पर।

मलिक का मानना था कि मोदी सरकार की किसान-विरोधी नीतियां देश के किसानों के लिए खतरनाक हैं, और वह इन नीतियों के खिलाफ आंदोलन करने का इरादा रखते थे।

किरू हाइड्रो प्रोजेक्ट स्कैम

सत्यपाल मलिक का नाम एक और विवाद में आया, जब उनका नाम किरू जलविद्युत परियोजना से जुड़ी अनियमितताओं में सामने आया। सीबीआई ने इस मामले में आरोप पत्र दायर किया था, जिसमें मलिक और अन्य अधिकारियों के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि प्रोजेक्ट में अनियमितताओं के कारण 2,200 करोड़ रुपये के सिविल वर्क के ठेके में घोटाला हुआ था। हालांकि, यह मामला अब भी न्यायालय में लंबित है।

अंतिम विदाई

सत्यपाल मलिक का निधन भारतीय राजनीति के एक बड़े अध्याय का अंत है। उनके योगदान और विवादों ने उन्हें हमेशा सुर्खियों में बनाए रखा। उनके जाने से राजनीति में एक खालीपन आ गया है। उनके परिवार, मित्रों और समर्थकों के लिए यह एक भारी सदमा है।

उनकी यादें और उनके द्वारा किए गए योगदान हमेशा भारतीय राजनीति में जीवित रहेंगे।

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