जयपुर, राजस्थान – राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ट्रॉमा बिल्डिंग में रविवार देर रात लगी आग ने 7 लोगों की जान ले ली. आग रात करीब 11 बजकर 10 मिनट पर लगी, जब अस्पताल के न्यूरो वार्ड के स्टोर रूम से अचानक धुआं उठने लगा. प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को हादसे का कारण माना जा रहा है. मरने वालों में आगरा, जयपुर और भरतपुर के मरीज शामिल हैं जो इलाज के लिए अस्पताल आए थे.
🔥 कैसे लगी आग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार रात को ट्रॉमा बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर स्थित न्यूरो वार्ड के स्टोर से धुआं निकलना शुरू हुआ. मरीजों ने तुरंत स्टाफ को इसकी सूचना दी, लेकिन कुछ ही मिनटों में धुआं पूरे वार्ड में फैल गया. स्टाफ और मरीज घबराकर भागने लगे. ट्रॉमा सेंटर में उस समय 210 मरीज भर्ती थे, जिनमें से 40 आईसीयू में थे.
रात में सीमित स्टाफ होने के कारण हालात बिगड़ गए. हर आईसीयू में सिर्फ एक कर्मचारी मौजूद था, जो धुआं फैलते ही बाहर निकल गया. नतीजतन कई गंभीर और कोमा में पड़े मरीजों को समय पर बाहर नहीं निकाला जा सका. अस्पताल कर्मचारियों और वार्ड बॉयज ने ट्रॉली के सहारे मरीजों को बाहर निकाला, लेकिन 6 मरीजों को सीपीआर देने के बावजूद बचाया नहीं जा सका.
😔 जान गंवाने वालों की दर्दनाक कहानी
मृतकों में आगरा की 40 वर्षीय सर्वेश देवी शामिल हैं, जो इलाज के लिए आई थीं. धुएं से दम घुटने के कारण उनकी मौत हुई. जयपुर जिले के आंधी निवासी शेर सिंह की मां भी हादसे में नहीं बच पाईं. उन्होंने बताया, “जब आग लगी तो सब भाग गए, मैंने मां को खुद बाहर निकाला, लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुकी थीं।”
इसके अलावा, सवाई माधोपुर के बौली निवासी दिगंबर वर्मा एक्सीडेंट केस में भर्ती थे. भगदड़ में बाहर गिरने से उनकी भी मौत हो गई, हालांकि प्रशासन ने इसे अग्निकांड से अलग बताया है. अन्य मृतकों में पिंटू (सीकर), दिलीप (जयपुर), श्रीनाथ, रुक्मिणी, खुदरा (भरतपुर) और बहादुर (संगानेर, जयपुर) शामिल हैं.
🚨 जांच के आदेश और सरकारी कार्रवाई
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. जांच के लिए एक समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त इकबाल खान करेंगे.
समिति आग लगने के कारणों, अस्पताल प्रबंधन की तैयारी, अग्निशमन व्यवस्था, मरीजों की सुरक्षा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों की जांच करेगी. समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी.
🧯 FSL टीम करेगी जांच
जयपुर पुलिस कमिश्नर बिजू जॉर्ज जोसेफ ने बताया कि एफएसएल टीम घटनास्थल की जांच करेगी ताकि आग के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके. शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की संभावना जताई जा रही है. उन्होंने पुष्टि की कि 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य मरीजों को सुरक्षित वार्ड में शिफ्ट किया गया है.
🏥 चार मरीजों की हालत अभी भी गंभीर
एसएमएस ट्रॉमा सेंटर इंचार्ज डॉ. अनुराग धाकड़ ने बताया कि स्टाफ ने करीब 24 मरीजों की जान बचाई, लेकिन सात गंभीर मरीजों को नहीं बचाया जा सका. फिलहाल चार मरीजों की हालत नाजुक बताई जा रही है.
⚠️ लापरवाही के आरोप
पीड़ितों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एक परिजन ने बताया कि आग लगने से पहले चिंगारी दिखने पर डॉक्टरों को कई बार सूचना दी गई, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया. जब आग लगी, तब स्टाफ भाग गया और फायर एक्सटिंग्विशर या पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी.
🕯️ निष्कर्ष
जयपुर के एसएमएस अस्पताल का यह हादसा न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है बल्कि अस्पतालों में अग्निशमन सुरक्षा की कमजोर व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है. जिन जगहों पर मरीज जिंदगी की उम्मीद लेकर आते हैं, वहां ऐसी घटनाएं मानवता को झकझोर देती हैं.
सरकार ने जांच के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन अब ज़रूरत है कि इस हादसे से सबक लेकर अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में किसी की जान ऐसी लापरवाही की भेंट न चढ़े.
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