ग्वालियर में धार्मिक नारेबाजी से उपजा तनाव, मुस्लिम महिला CSP का वीडियो हुआ वायरल
मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में बीते दिनों एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं।
यह विवाद CSP (सिटी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) हिना खान और एडवोकेट अनिल मिश्रा के बीच हुआ, जिसमें धार्मिक नारेबाजी तक की नौबत आ गई।
वीडियो में मुस्लिम महिला अधिकारी ‘जय जय श्रीराम’ के नारे लगाते हुए नजर आईं और कहा —
यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस घटना पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला ग्वालियर कोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्ति लगाने के विवाद से जुड़ा है।
मूर्ति लगाने के पक्ष और विरोध में दो गुट बन गए — एक तरफ दलित समाज और समर्थक संगठन, वहीं दूसरी तरफ वकीलों का एक धड़ा।
इसी विवाद के बीच, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट अनिल मिश्रा की विवादित टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया।
उनकी टिप्पणी से आंबेडकर समर्थक संगठन भड़क गए और 15 अक्टूबर को बड़े आंदोलन की घोषणा कर दी।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने शहरभर में फ्लैग मार्च निकाला और कलेक्टरेट में शांति बैठक बुलाई।
रामचरितमानस पाठ को लेकर बढ़ा नया विवाद
इसी बीच, एक और विवाद रामचरितमानस पाठ आयोजन को लेकर खड़ा हो गया।
जानकारी के मुताबिक, एडवोकेट अनिल मिश्रा के समर्थक पटेल नगर स्थित हनुमान मंदिर के पास टेंट लगाकर रामायण पाठ करना चाहते थे।
लेकिन पुलिस ने सुरक्षा कारणों से इसकी अनुमति नहीं दी और CSP हिना खान ने टेंट का सामान लौटा दिया।
यही बात एडवोकेट अनिल मिश्रा और उनके समर्थकों को नागवार गुजरी।
उन्होंने आरोप लगाया कि हिना खान “सनातन विरोधी” हैं और हिंदू धार्मिक आयोजनों में बाधा डाल रही हैं।
‘जय श्रीराम’ बोलकर दिया जवाब — वायरल हुआ हिना खान का वीडियो
जैसे ही आरोप लगे, मौके पर मौजूद भीड़ के बीच CSP हिना खान ने खुद ‘जय जय श्रीराम, जय जय श्रीराम’ के उद्घोष लगाए।
उन्होंने कहा,
“नहीं, मैं सनातन विरोधी नहीं हूं… मैं सबके धर्म का सम्मान करती हूं।”
उनका यह जवाब वहां मौजूद लोगों को शांत करने के लिए था, ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न जाए।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें CSP हिना खान और एडवोकेट अनिल मिश्रा की बहस,
टेंट वापस किया जाना और भीड़ का नारे लगाना — सब कुछ कैमरे में कैद हो गया।
मंदिर पर ताला और सड़क पर धरना
रामचरितमानस पाठ रोकने के बाद मामला और गरम हो गया।
अनिल मिश्रा और उनके समर्थकों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक दबाव में मंदिर पर ताला डाल दिया गया, जिससे वे पाठ नहीं कर पाए।
गुस्साए लोगों ने पटेल नगर की सड़क पर धरना शुरू कर दिया और ‘सीताराम सीताराम’ का जाप करते हुए पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए।
धरने के दौरान माहौल तनावपूर्ण बना रहा, लेकिन पुलिस बल की तैनाती और वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से स्थिति काबू में रही।
सोशल मीडिया पर छिड़ी डिजिटल जंग
विवाद का असर सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दोनों पक्षों के समर्थकों ने एक-दूसरे पर जमकर निशाना साधा।
एक ओर दलित संगठनों ने अनिल मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोला,
वहीं दूसरी ओर कुछ यूजर्स ने CSP हिना खान के खिलाफ टिप्पणियां कीं।
प्रशासन ने फेक पोस्ट और भड़काऊ बयानों पर नजर रखते हुए कई सोशल मीडिया अकाउंट्स की निगरानी शुरू कर दी है।
प्रशासन का दखल: आंदोलन पर लगी रोक
शहर के माहौल को शांत करने के लिए ग्वालियर जिला प्रशासन ने सक्रियता दिखाई।
कलेक्टर कार्यालय में सोमवार और मंगलवार को दोनों पक्षों की बैठकों के बाद निर्णय लिया गया कि
15 अक्टूबर को कोई भी आंदोलन या सार्वजनिक सभा की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि
“किसी भी व्यक्ति को धार्मिक या राजनीतिक मुद्दे पर शहर की शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जो लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
CSP हिना खान की सूझबूझ की तारीफ
हालांकि मामला विवादों से घिरा रहा, लेकिन हिना खान की सूझबूझ और संयमित प्रतिक्रिया की कई लोग तारीफ कर रहे हैं।
उन्होंने धार्मिक नारेबाजी के बीच भी भीड़ को शांत रखने की कोशिश की और संभावित टकराव को टाल दिया।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा कि
“CSP हिना खान ने दिखा दिया कि वर्दी से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।”
निष्कर्ष
ग्वालियर में यह घटना सिर्फ धार्मिक विवाद नहीं, बल्कि संवेदनशील मुद्दों पर प्रशासनिक सतर्कता और समाजिक जिम्मेदारी की कसौटी भी है।
एक ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती,
दूसरी ओर धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की जिम्मेदारी — दोनों का संतुलन CSP हिना खान ने दिखाया है।

