कोलकाता की प्रतिष्ठित जादवपुर यूनिवर्सिटी (Jadavpur University) में हिजाब से जुड़ा एक विवाद इन दिनों चर्चा में है। परीक्षा के दौरान एक छात्रा से हिजाब हटाने को कहे जाने के आरोप के बाद मामला बढ़ता चला गया और इसका असर यूनिवर्सिटी के वार्षिक दीक्षांत समारोह तक देखने को मिला, जहां छात्रों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया।
परीक्षा के दौरान क्या हुआ था?
यह घटना पिछले सोमवार की है, जब यूजी थर्ड ईयर अंग्रेजी की परीक्षा चल रही थी। पीड़ित छात्रा का आरोप है कि परीक्षा के दौरान एक इनविजिलेटर ने उससे हिजाब हटाने को कहा। वजह यह बताई गई कि हिजाब के नीचे कोई वायरलेस हेडफोन या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस छिपी हो सकती है।
छात्रा का कहना है कि इस मांग से वह असहज और अपमानित महसूस करने लगी, क्योंकि उसे बिना ठोस कारण के सबके सामने रोका गया और परीक्षा बीच में छोड़नी पड़ी।
छात्रा ने लगाए भेदभाव के आरोप
छात्रा ने कहा कि उसने यूनिवर्सिटी के बाहर पहले भेदभाव झेला है, लेकिन कैंपस के भीतर वह खुद को हमेशा सुरक्षित महसूस करती थी। इस घटना के बाद उसका भरोसा टूट गया।
उसका आरोप है कि तलाशी के दौरान इनविजिलेटर ने उसके पहनावे और निजी पसंद पर भी सवाल किए, जैसे कि “क्या आप गर्मियों में भी हिजाब पहनती हैं?” छात्रा के अनुसार, ऐसे सवालों ने उसे मानसिक रूप से परेशान किया।
अलग कमरे में ली गई तलाशी
विवाद बढ़ने के बाद छात्रा को एक अलग कमरे में ले जाया गया, जहां एक महिला स्कॉलर और विभागाध्यक्ष की मौजूदगी में तलाशी ली गई। जांच के दौरान उसके पास से कोई भी प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नहीं मिली।
छात्रा ने सवाल उठाया कि जब कुछ भी गलत नहीं पाया गया, तो फिर उसे इस पूरी प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़ा।
दीक्षांत समारोह में छात्रों का विरोध
इस घटना को लेकर छात्रों में नाराजगी बढ़ती गई। यूनिवर्सिटी के वार्षिक दीक्षांत समारोह के दौरान दो छात्रों ने पोस्टर लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पोस्टरों पर लिखा था,
“जादवपुर यूनिवर्सिटी में इस्लामोफोबिया के लिए कोई जगह नहीं है।”
इस प्रदर्शन के बाद मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया। छात्र संघ ने इसे धार्मिक भेदभाव का मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन की सफाई
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा है कि इस घटना के पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी। अधिकारियों के मुताबिक, हाल के दिनों में परीक्षा के दौरान नकल के कुछ मामले सामने आए थे, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का इस्तेमाल किया गया था। इसी वजह से सुरक्षा जांच सख्त की गई थी।
प्रशासन का कहना है कि जांच तय नियमों के तहत की गई, लेकिन यह भी देखा जाएगा कि क्या प्रक्रिया के दौरान छात्रा के साथ कोई अनुचित व्यवहार हुआ।
आगे क्या होगा?
इस पूरे मामले को सुलझाने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्र संघ के बीच शुक्रवार को एक अहम बैठक होने जा रही है। बैठक का मकसद ऐसा समाधान निकालना है, जिससे धार्मिक भावनाओं का सम्मान और परीक्षा की निष्पक्षता व सुरक्षा—दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
फिलहाल, यह विवाद कैंपस में संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है और सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
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