जैसलमेर में 4500 साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता के अवशेष मिले, थार रेगिस्तान में खोजा गया अनोखा पुरास्थल

थार में पहली बार हड़प्पा कालीन सभ्यता के प्रमाण

🏺 थार में पहली बार हड़प्पा कालीन सभ्यता के प्रमाण

राजस्थान के सीमावर्ती जैसलमेर जिले में 4500 वर्ष पुरानी हड़प्पा सभ्यता के अवशेष खोजे गए हैं। यह खोज थार के रेतीले टीलों के बीच स्थित रातडिया री डेरी नामक स्थान पर की गई है, जो रामगढ़ तहसील से लगभग 60 किलोमीटर और सादेवाला से 17 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है।


🔬 इतिहासकारों और शोधकर्ताओं की संयुक्त खोज

यह महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज राजस्थान विश्वविद्यालय, राजस्थान विद्यापीठ उदयपुर और अन्य विशेषज्ञों की टीम द्वारा की गई है।
टीम में शामिल प्रमुख नाम हैं:

  • शोधार्थी दिलीप कुमार सैनी

  • इतिहासकार पार्थ जगाणी

  • प्रोफेसर जीवन सिंह खरकवाल

  • डॉ. तमेघ पंवार, डॉ. रविंद्र देवड़ा, चतर सिंह ‘जाम’

  • वरिष्ठ अध्यापक प्रदीप कुमार गर्ग

इन विशेषज्ञों ने खोज की पुष्टि की है और इस पर आधारित रिसर्च पेपर इंडियन जर्नल ऑफ साइंस में प्रकाशन के लिए भेजा गया है।


🏡 सभ्यता के प्रमाण: नगरीय जीवन के संकेत

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह स्थल हड़प्पा सभ्यता की नगरीय संरचना, आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक विकास को दर्शाता है। यहाँ से निम्नलिखित प्रमुख वस्तुएं प्राप्त हुई हैं:

  • लाल मृदभांड: घड़े, कटोरे, परफोरेटेड जार

  • टेराकोटा केक: त्रिकोणीय, गोल और इडली जैसे

  • चर्ट पत्थर से बने औजार: 8-10 सेमी लंबे ब्लेड

  • मिट्टी और शंख की चूड़ियां

  • पत्थर की मिलें: अनाज पीसने के लिए


🔥 भट्टियों और ईंटों के प्रमाण

इस स्थल के दक्षिणी ढलान पर एक प्राचीन भट्टी मिली है, जिसके बीच में एक कॉलम (स्तंभ) भी मौजूद है। ऐसी भट्टियां पहले गुजरात के कानमेर और पाकिस्तान के मोहनजोदड़ो में पाई जा चुकी हैं।

इसके अलावा वेज़ ब्रिक्स (Wedge Bricks) और गोलाकार दीवारों में प्रयुक्त सामान्य ईंटों के अवशेष भी मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि यहाँ व्यवस्थित निर्माण कार्य हुआ करता था।


🌊 सरस्वती नदी से संबंध का अनुमान

डॉ. पंकज चांडक और डॉ. कृष्णपाल सिंह द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने अनुमान जताया है कि यह पुरास्थल विलुप्त सरस्वती नदी के मुहाने पर स्थित रहा होगा।
स्थल का अनुमानित क्षेत्रफल लगभग 50×50 मीटर है। यहां प्राचीन ईंटों से बनी दीवारों, चाक मृदभांड, चर्ट पत्थर के चाकुओं और ज्यामितीय रेखाओं से अलंकृत पात्रों के अवशेष मिले हैं।

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📍 स्थानीय योगदान: खोज को मिली दिशा

इस खोज में रामगढ़ के भोजराज की ढाणी से जुड़े राउमा विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक प्रदीप कुमार गर्ग का विशेष योगदान रहा। उन्होंने इस स्थल की जानकारी Save Our Heritage Foundation और प्रख्यात इतिहासकारों तक पहुंचाई, जिससे इस खोज को व्यापक पहचान मिली।


🧭 क्यों है यह खोज महत्वपूर्ण?

  • यह थार के रेगिस्तान में हड़प्पा कालीन सभ्यता का पहला ज्ञात पुरास्थल है।

  • यह खोज राजस्थान और गुजरात के बीच के क्षेत्र में हड़प्पा सभ्यता के प्रसार को प्रमाणित करती है।

  • इसकी सीमा पाकिस्तानी बॉर्डर के निकट है, जिससे इसका ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।


📌 निष्कर्ष: राजस्थान का नया पुरातात्विक गौरव

थार रेगिस्तान की कठिन जलवायु और दुर्गम क्षेत्र के बीच हड़प्पा सभ्यता के ऐसे ठोस प्रमाण मिलना भारत के प्राचीन इतिहास को नए दृष्टिकोण से समझने में मदद करेगा। अगर यहां आगे भी वैज्ञानिक खुदाई की जाए, तो और भी गहरे रहस्य सामने आ सकते हैं जो हड़प्पा कालीन जीवन, वाणिज्य, और संस्कृति की झलक देंगे।


मुख्य तथ्य एक नजर में

विषय विवरण
स्थान रातडिया री डेरी, जैसलमेर, राजस्थान
सभ्यता हड़प्पा कालीन (लगभग 4500 वर्ष पुरानी)
खोजकर्ता दिलीप कुमार सैनी एवं टीम
प्रमुख अवशेष मृदभांड, चूड़ियां, औजार, ईंटें, भट्टी
ऐतिहासिक महत्त्व थार में हड़प्पा सभ्यता की पहली खोज

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