झालावाड़ स्कूल हादसा: जर्जर इमारत ढही, मां ने खोए दोनों बच्चे – ‘आंगन अब सन्नाटे में डूबा’

मां ने खोए दोनों बच्चे – 'आंगन अब सन्नाटे में डूबा'

झालावाड़ (राजस्थान): राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोड गांव में शुक्रवार को हुए स्कूल हादसे ने सात परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत का हिस्सा अचानक गिरने से सात मासूमों की जान चली गई, जिनमें एक ही परिवार के भाई-बहन मीना (12) और कान्हा (6) भी शामिल थे। उनकी मां की चीखें और दर्दनाक सवाल अब गांव की खामोशी को चीर रहे हैं।


‘भगवान मुझे उठा लेता, बच्चों को बचा लेता’ – मां का दर्द

हादसे के बाद गांव का हर घर गमगीन है, लेकिन सबसे ज्यादा मातम उस मां के आंगन में पसरा है, जिसने अपने दोनों बच्चों को खो दिया। वह रोते हुए बार-बार कहती रही,
“मेरे दो ही बच्चे थे… दोनों चले गए। अब घर सूना है, आंगन सूना है। भगवान मुझे उठा लेता, बच्चों को बचा लेता।”

कुछ दिन पहले तक यही घर बच्चों की हंसी-ठिठोली से गूंजता था। अब वहां सिर्फ सन्नाटा, टूटी किताबें और बिखरे खिलौने रह गए हैं।


35 बच्चे दबे, 7 की मौत, 28 घायल

एजेंसी के अनुसार, शुक्रवार सुबह पिपलोड सरकारी स्कूल में कक्षा 6 और 7 के छात्र-छात्राएं प्रार्थना के लिए इकट्ठा हुए थे। अचानक स्कूल भवन का एक हिस्सा भरभरा कर गिर पड़ा।

  • 35 से अधिक बच्चे मलबे में दब गए।

  • 28 बच्चे घायल हुए।

  • सात मासूमों की मौके पर मौत हो गई।

गांववालों और स्थानीय युवकों ने हाथों से मलबा हटाकर बच्चों को निकालना शुरू किया। कई बच्चे गंभीर रूप से घायल पाए गए, जिन्हें झालावाड़ के एसआरजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

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लाशों के बीच मातम, एक साथ अंतिम संस्कार

शनिवार सुबह एसआरजी अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर मातम का माहौल था। कई माताएं अपने बच्चों के शवों से लिपटी बैठी थीं।
मीना और कान्हा का अंतिम संस्कार तीन अन्य बच्चों के साथ एक ही चिता पर किया गया। बाकी दो बच्चों की अंत्येष्टि अलग-अलग की गई।


प्रशासन पर सवाल, ग्रामीणों का गुस्सा

गांव के लोगों का कहना है कि स्कूल की इमारत लंबे समय से जर्जर थी और कई बार शिकायतें की गई थीं।
एक गुस्साई मां ने कहा,
“टीचर कहां थे जब दीवार गिरी? बच्चों को अकेला क्यों छोड़ा गया? प्रशासन हमारी सुनवाई क्यों नहीं करता?”

हादसे के बाद गुराड़ी चौराहे और एसआरजी अस्पताल के बाहर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। पुलिस को भीड़ हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें एक पुलिसकर्मी घायल हुआ।


मुआवजा और कार्रवाई की घोषणा

राजस्थान के स्कूल शिक्षा मंत्री ने घटनास्थल का दौरा किया और घोषणा की:

  • प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा।

  • गांव में नया स्कूल भवन बनाने का वादा।

  • पांच स्कूल कर्मियों का निलंबन और हाई-लेवल जांच समिति का गठन।

झालावाड़ कलेक्टर अजय सिंह ने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी और निलंबन को बर्खास्तगी में बदला जा सकता है।


मलबे में बिखरे जूते और किताबें – और कई सवाल बाकी

हादसे के बाद बच्चों के छोटे-छोटे जूते, टूटी स्लेट और किताबें मलबे में बिखरी पड़ी थीं। गांव के लोग पूछ रहे हैं –
“प्रशासन की लापरवाही से सात मासूमों की जान गई। मुआवजा तो मिलेगा, लेकिन क्या कभी उनकी हंसी लौटेगी?”

राज्य सरकार ने सभी स्कूल भवनों की जांच और सुरक्षा प्रमाणन के आदेश दिए हैं। तब तक कई स्कूलों की कक्षाएं अस्थायी रूप से रोकी जा सकती हैं।


(यह रिपोर्ट प्रशासनिक और प्रत्यक्षदर्शी सूत्रों पर आधारित है। आगे की जांच में नए तथ्य सामने आ सकते हैं।)

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