14 दिन बाद मिला सुराग
मध्य प्रदेश के कटनी की रहने वाली अर्चना तिवारी के लापता होने का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। 7 अगस्त को इंदौर से कटनी जाने के लिए नर्मदा एक्सप्रेस में सवार होने के बाद अर्चना अचानक गायब हो गई थी। करीब 14 दिन बाद अर्चना ने अपने परिवार को फोन कर सकुशल होने की जानकारी दी। इस फोन कॉल पर उसने अपनी मां से भी बातचीत की। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उसने फोन कहां से किया।
परिवार ने जताई राहत, लेकिन सवाल बाकी
परिवार का कहना है कि अर्चना सकुशल है और उसने सीधे कॉल करके उनकी चिंता कुछ हद तक दूर की है। लेकिन अभी भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वह दो हफ्तों तक कहां थी और किसके साथ थी? फोन कॉल की लोकेशन भी फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है।
ग्वालियर के कांस्टेबल पर शक
इस केस में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि अर्चना का ट्रेन टिकट ग्वालियर जिले के एक पुलिस कांस्टेबल ने बुक किया था। इसी आधार पर रेलवे पुलिस (GRP) ने कांस्टेबल से पूछताछ शुरू कर दी है।
GRP की जांच में नया मोड़
GRP को मिले सबूतों के अनुसार अर्चना का टिकट कांस्टेबल ने ही जारी करवाया था। इस खुलासे के बाद मामला और पेचीदा हो गया है। GRP और पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कांस्टेबल और अर्चना के बीच क्या संबंध था और उसकी भूमिका क्या हो सकती है।
कॉल की लोकेशन अब भी रहस्य
भले ही अर्चना ने परिवार से बात कर उन्हें भरोसा दिलाया कि वह सुरक्षित है, लेकिन पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह कॉल किस जगह से की गई थी। तकनीकी जांच के बावजूद अब तक कॉल की लोकेशन ट्रेस नहीं हो पाई है।
प्रशासन और परिवार की उम्मीदें
परिवार अब अर्चना की वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। वहीं पुलिस और GRP पूरी कोशिश कर रही है कि जल्द से जल्द अर्चना का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि कांस्टेबल से मिली जानकारी और कॉल डिटेल्स इस केस को सुलझाने में अहम साबित हो सकती हैं।
निष्कर्ष
अर्चना तिवारी केस अब सिर्फ लापता होने तक सीमित नहीं रहा। ग्वालियर के कांस्टेबल का नाम सामने आने और 14 दिन बाद अचानक अर्चना के कॉल करने से कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। परिवार को जहां उसकी सकुशलता की खबर से राहत मिली है, वहीं पुलिस की जांच अब नए एंगल पर केंद्रित हो गई है।

