जम्मू-कश्मीर, 29 जुलाई 2025: जम्मू-कश्मीर के दाछीगाम क्षेत्र में ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस ऑपरेशन के दौरान तीन पाकिस्तानी आतंकियों को मारा गया, जिनमें से एक आतंकवादी पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड था। इन आतंकियों की पहचान के लिए एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जो आतंकियों को शरण देने के आरोप में पकड़े गए हैं।
दाछीगाम में ऑपरेशन महादेव
दाछीगाम के घने जंगलों में हुई इस मुठभेड़ को ‘ऑपरेशन महादेव’ नाम दिया गया था। सेना और पुलिस की संयुक्त टीम ने 14 दिनों तक आतंकियों की ट्रैकिंग की, जिसके बाद इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। यह मुठभेड़ महादेव और जबरवान की रेंज के बीच स्थित जंगलों में हुई, जहां जुलाई की शुरुआत में संदिग्ध सैटेलाइट कम्युनिकेशन की जानकारी मिली थी। इसके बाद सेना और पुलिस ने इन आतंकवादियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी।
एनआईए की हिरासत में दो संदिग्ध
एनआईए ने दाछीगाम एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों की पहचान के लिए दो स्थानीय लोगों को हिरासत में लिया है। इन दोनों संदिग्धों, परवेज अहमद और बशीर अहमद पर आतंकियों को शरण देने का आरोप है। एनआईए का दावा है कि इन दोनों को ऑपरेशन महादेव में मारे गए आतंकियों की पहचान करने के लिए ले जाया गया है। हालांकि, अभी तक इन दोनों की गिरफ्तारी के बारे में और अधिक जानकारी सामने नहीं आई है।
मारे गए आतंकियों की पहचान
‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान मारे गए आतंकियों में लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर सुलेमान शाह उर्फ मूसा फौजी शामिल हैं। मूसा फौजी वह आतंकवादी था जिसने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की साजिश रची थी, जिसमें 26 नागरिकों की जान चली गई थी। इसके अलावा, मूसा का नाम पिछले साल श्रीनगर-सोनमर्ग हाईवे पर 7 मजदूरों की हत्या में भी शामिल था।
ट्रैकिंग और सैटेलाइट कम्युनिकेशन
एनकाउंटर के दौरान सेना ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन का इस्तेमाल करते हुए आतंकियों के ठिकाने का पता लगाया। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों का यह समूह मुल्तान से जुड़ा हुआ था। स्थानीय बकरवाल समुदाय ने इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सेना को पुख्ता जानकारी दी।
सैटेलाइट कम्युनिकेशन सक्रिय होने के बाद, सेना और पुलिस की टीम ने आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखी और अंतिम समय में ऑपरेशन को अंजाम दिया।
बरामद किए गए हथियार
एनकाउंटर के बाद सेना और पुलिस की संयुक्त टीम को आतंकवादियों के शव निकालने के लिए आठ घंटे तक कठिन ट्रैकिंग करनी पड़ी। इस ऑपरेशन में कई हथियार बरामद किए गए, जिनमें 17 ग्रेनेड, एक M4 कारबाइन और दो AK-47 राइफल शामिल हैं। ये हथियार आतंकवादियों द्वारा भारतीय सुरक्षाबलों के खिलाफ इस्तेमाल किए जा सकते थे।
आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सेना की कड़ी कार्रवाई
यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सेना की निरंतर कड़ी कार्रवाई का हिस्सा है। ‘ऑपरेशन महादेव’ में मारे गए आतंकियों का संबंध कई प्रमुख आतंकवादी गतिविधियों से था, जिसमें पहलगाम हमला और मजदूरों की हत्या शामिल हैं। भारतीय सेना का यह अभियान इस बात का संकेत है कि वह आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में पूरी तरह से सक्षम है।
निष्कर्ष
दाछीगाम में हुए ऑपरेशन महादेव के जरिए भारतीय सेना और पुलिस ने आतंकवादियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता प्राप्त की है। तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों का खात्मा और महत्वपूर्ण हथियारों की बरामदगी ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ भारत की सुरक्षा एजेंसियां सख्त कार्रवाई कर रही हैं। एनआईए की हिरासत में लिए गए संदिग्धों से आतंकियों की पहचान और अन्य जानकारी मिलने की उम्मीद है, जो आने वाले समय में इस मामले की जांच में मददगार साबित हो सकती है।
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