लाल किला धमाके की गुत्थी सुलझी
दिल्ली ब्लास्ट मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। लाल किले के पास हुए धमाके में जिस व्यक्ति की जली हुई लाश कार से मिली थी, उसकी पहचान आतंकी डॉ. उमर मोहम्मद के रूप में हुई है। डीएनए टेस्ट में उमर का सैंपल उसकी मां के सैंपल से 100 प्रतिशत मैच कर गया है। इसका मतलब साफ है कि धमाके के वक्त डॉ. उमर उसी कार में मौजूद था और विस्फोट में उसकी मौत हो गई।
कैसे हुई पहचान की पुष्टि
धमाके के बाद जांच टीम को कार में कई जले हुए अवशेष मिले थे। शुरुआत में शव की हालत इतनी खराब थी कि पहचान मुश्किल हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने पुलवामा से उमर की मां का डीएनए सैंपल लिया और उसे दिल्ली की फॉरेंसिक लैब में भेजा गया। वहां कार में मिले जले हुए टुकड़ों से डीएनए की तुलना की गई, जो 100% मैच कर गई।
धमाके में अब तक 12 की मौत
दिल्ली ब्लास्ट में अब तक कुल 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 10 शवों की पहचान हो चुकी है। उमर मोहम्मद की पहचान होने के बाद अब केवल दो शव ऐसे बचे हैं जिनकी पहचान डीएनए जांच से की जाएगी। जांच एजेंसियों ने बताया कि उमर के शव के कुछ हिस्से कार में क्षत-विक्षत हालत में मिले थे।
फरीदाबाद से दिल्ली तक उमर की अंतिम यात्रा
पुलिस जांच के अनुसार, डॉ. उमर फरीदाबाद से फरार होने के बाद मेवात और फिरोजपुर झिरका होते हुए दिल्ली की ओर लौटा था। उसने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक ढाबे में रात गुजारी और अगले दिन दिल्ली की ओर बढ़ा। सीसीटीवी फुटेज में भी उसे एक्सप्रेसवे पर देखा गया था। बताया जा रहा है कि धमाके से करीब 11 दिन पहले उमर ने सफेद रंग की i20 कार खरीदी थी, जिसमें बाद में विस्फोट हुआ।
डीएनए टेस्ट कैसे करता है पहचान की पुष्टि
डीएनए यानी डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (Deoxyribonucleic Acid) हमारे शरीर की हर कोशिका में मौजूद वह अणु है जिसमें हमारी आनुवंशिक जानकारी होती है। हर व्यक्ति का डीएनए यूनिक होता है, जैसे एक विशेष बारकोड।
डीएनए टेस्ट में खून, हड्डी, दांत, या गाल के अंदरूनी हिस्से से सैंपल लेकर उसकी संरचना को विश्लेषित किया जाता है। फिर उस पैटर्न को परिवार के किसी सदस्य के डीएनए से मिलाया जाता है। अगर पैटर्न पूरी तरह मेल खा जाए, तो पहचान की पुष्टि हो जाती है।
ब्लास्ट के बाद कैसे मिला डीएनए
धमाके के बाद कार के मलबे से हड्डियों और मांस के टुकड़ों को इकट्ठा किया गया। इन सैंपलों को विशेष रसायनों से साफ करके कोशिकाओं से डीएनए निकाला गया। चूंकि ब्लास्ट के दौरान तापमान बहुत ज्यादा (लगभग 1000 डिग्री सेल्सियस) था, कई सैंपलों का डीएनए नष्ट हो गया। फिर भी हड्डियों में मौजूद मिनरल्स से सुरक्षित डीएनए मिल गया, जिससे जांच संभव हुई।
फॉरेंसिक टीम की अहम भूमिका
दिल्ली पुलिस की फॉरेंसिक टीम ने इस केस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने STR (Short Tandem Repeat) प्रोफाइलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें डीएनए के खास हिस्सों की तुलना की जाती है। यही तकनीक जले हुए या क्षत-विक्षत शवों की पहचान में सबसे विश्वसनीय मानी जाती है।
निष्कर्ष
डीएनए जांच ने साबित कर दिया है कि डॉ. उमर मोहम्मद वही आतंकी था जो दिल्ली ब्लास्ट की साजिश का मुख्य मास्टरमाइंड था। अब जांच एजेंसियां उसके नेटवर्क और सहयोगियों की तलाश में जुटी हैं। यह सफलता न केवल दिल्ली पुलिस के लिए बड़ी राहत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि फॉरेंसिक साइंस आतंकवाद की जांच में कितना महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
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