दिल्ली में उमस और गर्मी से रिकॉर्ड बिजली की मांग, मॉनसून भी नहीं दे पाया राहत

दिल्ली की गर्मी और उमस ने बढ़ाई मुश्किलें

दिल्ली की गर्मी और उमस ने बढ़ाई मुश्किलें

दिल्ली में इस बार मॉनसून के बावजूद उमस और गर्मी ने लोगों को राहत नहीं दी। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की नई रिपोर्ट बताती है कि 2025 की गर्मियों में हीट इंडेक्स 46 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, जिससे एयर कंडीशनर और कूलर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ गया। इसका सीधा असर बिजली की खपत पर पड़ा और मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।


रिकॉर्ड तोड़ बिजली की खपत

दिल्ली की बिजली की मांग ने 2025 में नया इतिहास रच दिया। 12 जून 2025 को रात 11:09 बजे खपत 8442 मेगावाट (MW) तक पहुंची। यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। पिछले साल जून 2024 में यह 8656 MW दर्ज किया गया था।
2015 से 2025 के बीच दिल्ली की बिजली की मांग 5846 MW से बढ़कर 8442 MW हो गई, यानी महज 10 साल में 44% की बढ़ोतरी।


रातों की गर्मी बनी खतरा

दिल्ली में सिर्फ दिन ही नहीं, बल्कि रातें भी असामान्य रूप से गर्म हो गई हैं। पहले रात का तापमान 15 डिग्री तक गिर जाता था, लेकिन 2025 में यह अंतर घटकर सिर्फ 8.6 डिग्री रह गया। मॉनसून के दौरान औसत रात का तापमान 30.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 6 डिग्री ज्यादा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट की वजह से है। कंक्रीट की इमारतें और सड़कों पर जमी गर्मी रात में वापस निकलती है, जिससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता। इससे डिहाइड्रेशन, थकान और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।


मौसमी अंतर और बिजली की मांग

दिल्ली में मार्च से अगस्त के बीच बिजली की मांग चरम पर रहती है, जबकि सर्दियों में यह आधी रह जाती है। उदाहरण के तौर पर, जून 2024 में मांग 8656 MW और खपत 4546 मिलियन यूनिट (MU) थी, जबकि फरवरी 2025 में यह गिरकर 2041 MU रह गई।
मॉनसून में ज्यादा उमस की वजह से हीट इंडेक्स बढ़ने पर बिजली की मांग कई गुना बढ़ जाती है। CSE के मुताबिक, दिल्ली की 67% बिजली खपत सिर्फ गर्मी और उमस की वजह से होती है, जबकि बाकी का कारण आर्थिक गतिविधियां और जीवनशैली है।


जलवायु परिवर्तन का बढ़ता असर

विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट कहती है कि भारत में तापमान पिछले 10 वर्षों में तेजी से बढ़ा है। अब गर्मियां एक महीने पहले शुरू हो रही हैं।
अनुमान है कि हर 1 डिग्री तापमान बढ़ने पर बिजली की मांग लगभग 2% बढ़ जाती है। 2019 से 2022 के बीच कूलिंग की जरूरतों में 21% की वृद्धि हुई। इसका सबसे बड़ा असर गरीब परिवारों पर पड़ता है, क्योंकि वे एयर कंडीशनर खरीदने में सक्षम नहीं होते।


समाधान: दिल्ली को ठंडा रखने के उपाय

CSE ने दिल्ली में गर्मी और बिजली संकट से निपटने के लिए कुछ अहम सुझाव दिए हैं—

  • इमारतों में ऊर्जा बचत: एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड को लागू करना, रिफ्लेक्टिव छतों और बेहतर इन्सुलेशन का उपयोग।

  • कूलिंग शेल्टर: गरीबों और जरूरतमंदों के लिए अस्थायी कूलिंग शेल्टर बनाना।

  • शहरी हरियाली और जल स्रोत: अधिक पेड़-पौधे और पार्क विकसित करना, ताकि गर्मी कम हो और नमी संतुलित रहे।

  • बिजली प्रबंधन: मौसम के हिसाब से बिजली मांग का पूर्वानुमान लगाना, ताकि ग्रिड स्थिर रहे और आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों।


निष्कर्ष

दिल्ली की बढ़ती गर्मी और उमस ने न केवल लोगों का जीवन कठिन बना दिया है, बल्कि बिजली की मांग को भी खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है। 2025 में जहां खपत 8442 MW तक पहुंची, वहीं बढ़ती गर्म रातों ने सेहत पर भी खतरा पैदा कर दिया।
अगर समय रहते ऊर्जा बचत, हरियाली और स्मार्ट बिजली प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में दिल्लीवासियों को और बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

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