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दिल्ली में जलभराव की समस्या से छुटकारा: 57 हजार करोड़ रुपये का नया ड्रेनेज मास्टर प्लान लॉन्च

57 हजार करोड़ रुपये का नया ड्रेनेज मास्टर प्लान लॉन्च

दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बरसात के दौरान जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए सरकार ने 57 हजार करोड़ रुपये की महत्त्वाकांक्षी योजना शुरू की है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को इसका अनावरण किया।

इस मास्टर प्लान के तहत दिल्ली के पुराने ड्रेनेज, नाले और सीवरेज सिस्टम को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा। साथ ही यमुना नदी के बाढ़ नियंत्रण और जलाशय निर्माण की भी योजना है।


मास्टर प्लान की मुख्य विशेषताएं

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि बांध निर्माण पर अनुमानित खर्च करीब 6134 करोड़ रुपये आएगा। उनका कहना है कि मानसून के दिनों में बैराज के पास से आने वाला पानी इतनी मात्रा में होता है कि उसे रोकना मुश्किल होता है। अगर पानी पूरी तरह रोका जाए, तो बांध टूट सकता है और दिल्ली में तबाही मच सकती है। इसलिए यमुना नदी की क्षमता बढ़ाना बेहद जरूरी है।


दिल्ली के प्रमुख जलभराव वाले क्षेत्रों में सुधार

विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे ज्यादा समस्या ITO बैराज से ओखला बैराज के बीच 14 किलोमीटर लंबे स्ट्रेच में है। इस क्षेत्र में यमुना की गहराई असमान है। उदाहरण के लिए, ITO बैराज के पास गहराई लगभग 207 मीटर है, जबकि ओखला बैराज के पास गहराई 200 मीटर है। डिसिल्टिंग और जलाशय निर्माण से इस समस्या का समाधान होगा।


सड़कों और स्वच्छता पर प्रभाव

ड्रेनेज मास्टर प्लान लागू होने के बाद दिल्ली की सड़कों पर बरसात के दौरान पानी भरने की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही राजधानी में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को गति मिलेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना केवल बाढ़ और जलभराव से ही राहत नहीं देगी, बल्कि लंबे समय तक राजधानी में पानी प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन को भी बेहतर बनाएगी।


सरकार की दीर्घकालिक योजना

केंद्रीय और राज्य सरकार का कहना है कि यह योजना 50 साल बाद दिल्ली के लिए तैयार किया गया पहला बड़ा ड्रेनेज मास्टर प्लान है। इसके पूरा होने के बाद दिल्ली को आने वाले कई वर्षों तक जलभराव और बाढ़ से राहत मिलेगी।

मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि इस योजना से न केवल बाढ़ पर नियंत्रण मिलेगा, बल्कि बिजली उत्पादन और जलापूर्ति जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं में भी सुधार होगा। साथ ही, यह योजना शहर में सतत विकास और पर्यावरण सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगी।


निष्कर्ष

57 हजार करोड़ रुपये के इस मास्टर प्लान के लागू होने से दिल्ली की बाढ़ और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान मिलना संभव होगा। आधुनिक तकनीक से नालों, सीवरेज और यमुना नदी के सुधार से राजधानी को लंबे समय तक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिलेगा।

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