दिल्ली में ‘साइलेंट किलर’ बनता प्रदूषण: अस्पतालों में बढ़े मरीज, हेल्थ इमरजेंसी के हालात — एक्सपर्ट की चेतावनी

दिल्ली में ‘साइलेंट किलर’ बनता प्रदूषण

दिल्ली की हवा फिर जहरीली: सांस लेना हुआ मुश्किल

दिल्ली-एनसीआर में ठंड बढ़ने के साथ वायु गुणवत्ता (Air Quality) एक बार फिर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई इलाकों में 300 से पार दर्ज किया गया है।
आनंद विहार में AQI 371, लोधी रोड पर 312 और कर्तव्य पथ के पास 307 तक पहुंच गया है।
हवा में मौजूद जहरीले कण अब लोगों के फेफड़ों, हृदय और मस्तिष्क पर सीधा असर डाल रहे हैं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पूर्व निदेशक और वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. रणदीप गुलेरिया ने चेतावनी दी है कि

“दिल्ली में स्थिति हेल्थ इमरजेंसी जैसी हो गई है। यह प्रदूषण धीरे-धीरे लोगों को मौत की ओर धकेल रहा है।”


अस्पतालों में बढ़े मरीज, सांस की बीमारियों में 20% तक बढ़ोतरी

डॉ. गुलेरिया के मुताबिक, प्रदूषण बढ़ने के बाद पिछले कुछ दिनों में अस्पतालों में
सांस की तकलीफ, खांसी और फेफड़ों की पुरानी बीमारियों (अस्थमा, COPD) के मरीजों की संख्या 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

उन्होंने बताया कि अब सिर्फ बुजुर्ग या पहले से बीमार व्यक्ति ही नहीं, बल्कि
युवा और बच्चे भी सीने में जकड़न, खांसी और सांस फूलने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण के असर चार से छह दिन बाद दिखने लगते हैं।


‘साइलेंट किलर’ क्यों कहा जाता है प्रदूषण को?

डॉ. गुलेरिया ने वायु प्रदूषण को ‘साइलेंट किलर’ करार दिया है।
उन्होंने बताया कि हवा में मौजूद बारीक कण (PM2.5) शरीर में घुसकर
रक्त वाहिकाओं में सूजन, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को बढ़ा देते हैं।
यह दिल की बीमारियों, स्ट्रोक, और कैंसर जैसी घातक समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

विश्व स्तर पर 2021 में वायु प्रदूषण के कारण 8 मिलियन से अधिक मौतें दर्ज की गईं,
जो कोविड-19 से भी ज्यादा थीं।
हालांकि, यह मौतें कभी सीधे प्रदूषण के नाम पर दर्ज नहीं होतीं,
बल्कि इससे जुड़ी बीमारियां लोगों की जान ले लेती हैं।


दिल्ली में धुंध और धुएं से बनी जहरीली परत

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, तापमान में गिरावट और हवा की गति धीमी होने से
प्रदूषण के कण हवा में फंस गए हैं, जिससे आसमान में घनी धुंध (Smog) की परत बन गई है।
आया नगर का न्यूनतम तापमान 13.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया,
जो इस सीजन का सबसे ठंडा दिन था।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के मुताबिक,
दिल्ली का औसत AQI 318 रहा, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है।
प्रशासन ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कई जगहों पर
वॉटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन लगाने शुरू कर दिए हैं।


प्रदूषण से बढ़ रही मानसिक और शारीरिक समस्याएं

डॉ. गुलेरिया ने बताया कि प्रदूषण का असर अब दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिख रहा है।
कई लोग थकान, ध्यान की कमी, सिरदर्द और नींद की कमी की शिकायत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा —

“यह क्लासिक ब्रेन फॉग नहीं है, लेकिन लोग स्पष्ट रूप से कम सतर्क और कम ऊर्जा महसूस कर रहे हैं।”

शहर के कई हिस्सों में लोगों ने आंखों में जलन, गले में खराश और सिरदर्द जैसी शिकायतें भी दर्ज कराई हैं।
सड़कों पर घनी धुंध के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।


कैसे करें प्रदूषण से बचाव?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों को प्रदूषण से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी हैं —

  • मास्क पहनें, खासकर बाहर जाते समय N95 या N99 मास्क का प्रयोग करें।

  • सुबह या शाम के समय व्यायाम से बचें, जब हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित होती है।

  • बच्चों और बुजुर्गों की बाहरी गतिविधि सीमित करें।

  • घर में एयर प्यूरिफायर का उपयोग करें।

  • फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए संतुलित आहार और पर्याप्त पानी लें।


निष्कर्ष: दिल्ली की हवा में ज़हर, अब सिर्फ चेतावनी नहीं कार्रवाई जरूरी

दिल्ली की हवा हर साल सर्दियों में जहरीली हो जाती है,
लेकिन इस बार स्थिति और भी गंभीर है।
डॉ. गुलेरिया के शब्दों में —

“यह प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य आपदा बन चुका है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए गए,
तो आने वाले दिनों में दिल्ली हेल्थ इमरजेंसी की स्थिति में पहुंच सकती है।

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