Site icon Post4india

दिल्ली हाई कोर्ट में छह नए जजों ने ली शपथ, कॉलेजियम में भी हुआ पुनर्गठन

दिल्ली हाई कोर्ट में छह नए जजों ने ली शपथ

जजों की संख्या बढ़कर हुई 41, लंबित मामलों के निपटारे की उम्मीद

दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार, 21 जुलाई 2025 को छह नए जजों ने शपथ ली। इसके साथ ही हाई कोर्ट में कार्यरत जजों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है, जो स्वीकृत कुल 60 जजों में दो-तिहाई से अधिक है। इस नियुक्ति के साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट के तीन सदस्यीय कॉलेजियम का भी पुनर्गठन किया गया है।


इन छह जजों ने ली शपथ

सोमवार को जिन छह न्यायाधीशों ने दिल्ली हाई कोर्ट में शपथ ली, उनके नाम हैं:

इनमें से जस्टिस वेल्लूरी कामेश्वर राव पूर्व में कर्नाटक हाई कोर्ट में कार्यरत थे और अब अपने मूल दिल्ली हाई कोर्ट में लौट आए हैं।


कहां से हुआ किसका तबादला?

नवनियुक्त जजों का स्थानांतरण विभिन्न हाई कोर्ट से किया गया है:

इन तबादलों से न केवल दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है।


लंबित मामलों की संख्या अभी भी चुनौती

हाई कोर्ट की जून 2025 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट में लगभग 1.25 लाख से अधिक मुकदमे लंबित हैं। हाल ही में कुछ जजों के सेवानिवृत्त होने और तबादलों के चलते जजों की संख्या में कमी आ गई थी। इस नई नियुक्ति से अदालतों पर दबाव कुछ कम होने की संभावना है।


कॉलेजियम का हुआ पुनर्गठन

दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठतम जज जस्टिस विभु बाखरू को 16 जुलाई 2025 को कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत कर दिया गया। उनके प्रमोशन के चलते दिल्ली हाई कोर्ट के तीन सदस्यीय कॉलेजियम में बदलाव किया गया है।

नया कॉलेजियम सदस्य

अब तक कॉलेजियम में चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय, जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह शामिल थे। लेकिन सोमवार के शपथ ग्रहण के बाद कॉलेजियम में बदलाव हुआ और जस्टिस राव तथा जस्टिस सांबरे को नए सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, क्योंकि वे सीनियरिटी क्रम में जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह से ऊपर हैं।


क्या होता है कॉलेजियम सिस्टम?

कॉलेजियम प्रणाली भारत के न्यायिक तंत्र में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति और तबादले की प्रक्रिया से संबंधित है। यह प्रणाली भारतीय संविधान में लिखित नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के जरिए विकसित की गई है। इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के वरिष्ठ जज मिलकर नए जजों की नियुक्ति और स्थानांतरण की सिफारिश करते हैं।


निष्कर्ष

दिल्ली हाई कोर्ट में छह नए जजों की नियुक्ति और कॉलेजियम के पुनर्गठन से न केवल न्यायिक प्रणाली को मजबूती मिलेगी, बल्कि लंबित मामलों के शीघ्र समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम भी माना जा रहा है। न्यायिक नियुक्तियों की यह प्रक्रिया देशभर के न्यायिक ढांचे में संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल की कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी में 9 लोगों को उम्रकैद

Exit mobile version