बादल फटने से सहस्त्रधारा में मची अफरा-तफरी
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सहस्त्रधारा में देर रात भारी बारिश के चलते बादल फटने की घटना हुई। तेज बहाव में कई दुकानें बह गईं और लाखों का नुकसान हुआ। जिला प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। इस हादसे में दो लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश अभी जारी है।
जिला प्रशासन और बचाव दल सक्रिय
घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और लोक निर्माण विभाग की टीमें जेसीबी और अन्य उपकरणों के साथ मौके पर पहुंच गईं। राहत-बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। प्रशासन ने आसपास के लोगों को रात में ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया था।
देहरादून के अलावा ऋषिकेश की चंद्रभागा नदी भी उफान पर आ गई। हाईवे तक पानी पहुंचने से आवागमन प्रभावित हुआ। नदी में फंसे तीन लोगों को एसडीआरएफ ने सुरक्षित रेस्क्यू किया।
सीएम धामी ने जताया दुख
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा,
“देहरादून के सहस्त्रधारा में अतिवृष्टि से दुकानों को नुकसान पहुंचने की दुःखद सूचना प्राप्त हुई है। प्रशासन, एसडीआरएफ और पुलिस मौके पर मौजूद हैं। मैं स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहा हूं और सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं।”
स्कूलों में अवकाश घोषित
जिलाधिकारी ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से कक्षा 1 से 12 तक सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। एसडीएम कुमकुम जोशी रात में ही घटनास्थल पर पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया।
भारी बारिश से आईटी पार्क देहरादून में भी पानी भर गया। तेज बहाव में कई गाड़ियां सड़क पर बह गईं।
टपकेश्वर मंदिर और तमसा नदी भी प्रभावित
देहरादून की तमसा नदी भी भारी बारिश के कारण उफान पर है। टपकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में 1-2 फीट मलबा भर गया, जिससे शिवलिंग परिसर को काफी नुकसान हुआ है।
लाखों का नुकसान, लेकिन बड़ी अनहोनी टली
प्राकृतिक आपदा से सहस्त्रधारा में कई दुकानें पूरी तरह बह गईं। स्थानीय व्यापारियों को लाखों का आर्थिक नुकसान हुआ है। हालांकि, जिला प्रशासन और बचाव दल की त्वरित कार्रवाई से कई लोगों की जान बच गई और बड़ी अनहोनी टल गई।
निष्कर्ष
देहरादून का सहस्त्रधारा जहां सामान्य दिनों में पर्यटकों से गुलजार रहता है, वहीं इस बार बादल फटने की घटना ने तबाही मचा दी। प्रशासन अभी भी राहत और बचाव कार्य में जुटा है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम की अचानक तब्दीलियां कितनी खतरनाक साबित हो सकती हैं।

