उत्तरकाशी (उत्तराखंड) – उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली और हर्षिल क्षेत्रों में 5 अगस्त को बादल फटने और फ्लैश फ्लड के बाद शुरू हुआ राहत एवं बचाव अभियान सातवें दिन भी पूरी ताकत के साथ जारी है। सेना, NDRF और अन्य एजेंसियां हाई-टेक मशीनों, LiDAR सर्वे और ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) का इस्तेमाल कर मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटी हैं। अब तक 1,308 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है, जबकि 100 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
बारिश और मलबे ने बढ़ाई मुश्किलें
बीती रात हुई लगातार बारिश के कारण धराली में मलबा दलदल में बदल गया, जिससे रेस्क्यू टीमों को आगे बढ़ने में कठिनाई हो रही है। वहीं, मुखवा को धराली से जोड़ने वाले फुटओवर ब्रिज में दरारें आने से राहत कार्यों में नई चुनौती खड़ी हो गई है।
सेना और NDRF का हाई-टेक सर्च ऑपरेशन
भारतीय सेना की पैरा ब्रिगेड हर्षिल में नदी के ऊपर स्पीड बोट की मदद से अस्थायी रास्ता बनाने में जुटी है। NDRF का माउंटेनियरिंग डिवीजन उस पहाड़ी तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है, जहां से सैलाब की शुरुआत हुई थी। सेना रोप वे बनाने की भी योजना बना रही है, ताकि राहत सामग्री और मशीनरी आसानी से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई जा सके।
हेलिकॉप्टर और ड्रोन से तेज़ रफ्तार रेस्क्यू
10 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 326 हेलिकॉप्टर सॉर्टीज़ पूरी हो चुकी हैं। इनमें 8 चिनूक, MI-17 और ALH हेलिकॉप्टर के साथ 56 UCADA एयरक्राफ्ट शामिल हैं। बीते दिन ही 177 लोगों को मलबे से निकाला गया। सेना के ताज़ा अपडेट के अनुसार, 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार और LiDAR से खोज
मलबे के नीचे फंसे लोगों और शवों को ढूंढने के लिए सेना ने 2 GPR लगाए हैं, जबकि नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने 5 अतिरिक्त GPR तैनात किए हैं। सेना के चीता हेलिकॉप्टर ने LiDAR सर्वे के जरिए पूरे प्रभावित क्षेत्र का हाई-रेज़ोल्यूशन स्कैन किया है। इसके साथ ही 10 स्निफर डॉग्स भी सर्च ऑपरेशन में लगे हैं।
हर्षिल में एक पुल को फिर से तैयार किया जा चुका है, जिससे मशीनरी और राहत सामग्री का आवागमन आसान हो गया है। इस पूरे अभियान में 1,000 से अधिक जवान तैनात हैं।
दूसरे चरण के रेस्क्यू ऑपरेशन की तैयारी
उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दीपम सेठ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राहत कार्यों के पहले चरण की समीक्षा की। देहरादून में हुई उच्चस्तरीय बैठक में पुलिस की विभिन्न शाखाओं – SDRF, फायर सर्विस, PAC और टेलीकॉम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दूसरे चरण में खोज और बचाव अभियान को और तेज़ किया जाएगा, ताकि मलबे में दबे लोगों को जल्द से जल्द ढूंढकर सुरक्षित निकाला जा सके।
स्थानीय लोग भी मदद में जुटे
स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाएं और ग्रामीण भी राहत कार्यों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों के लिए भोजन, पानी और दवाओं की आपूर्ति लगातार जारी है।
चुनौतियां अभी भी बरकरार
बारिश का सिलसिला, दलदली मलबा और टूटे हुए रास्ते रेस्क्यू टीमों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिन इस अभियान के लिए बेहद अहम होंगे।
निष्कर्ष
धराली और हर्षिल में चल रहा यह रेस्क्यू ऑपरेशन उत्तराखंड के हालिया इतिहास के सबसे बड़े बचाव अभियानों में से एक बन गया है। तकनीकी साधनों, सैन्य बल और स्थानीय सहयोग के बावजूद 100 से अधिक लापता लोगों की तलाश अभी भी जारी है। प्रशासन ने साफ किया है कि जब तक अंतिम व्यक्ति नहीं मिल जाता, राहत और बचाव अभियान थमेगा नहीं।
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