“धोनी ने मुझे टीम से बाहर किया था, संन्यास लेना चाहता था…” वीरेंद्र सहवाग का चौंकाने वाला खुलासा

सचिन तेंदुलकर की सलाह ने बदली सहवाग की किस्मत

सचिन तेंदुलकर की सलाह ने बदली सहवाग की किस्मत

नई दिल्ली, 15 अगस्त 2025: भारतीय क्रिकेट के महान सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कैसे महेंद्र सिंह धोनी ने उन्हें 2008 में टीम से बाहर कर दिया था, और वह उस समय संन्यास लेने के बारे में सोच रहे थे। लेकिन सचिन तेंदुलकर की एक सलाह ने उनकी दिशा बदल दी और उन्होंने 2011 में भारत की वर्ल्ड कप जीत में अहम योगदान दिया।


धोनी के फैसले से सहवाग को लगी चोट

वीरेंद्र सहवाग ने पद्मजीत सहवाग के यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान खुलासा किया कि 2007-08 की त्रिकोणीय सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनके प्रदर्शन के बाद एमएस धोनी ने उन्हें टीम से बाहर कर दिया था। सहवाग ने कहा, “मैंने उस सीरीज में शुरुआती तीन मुकाबले खेले, लेकिन फिर धोनी ने मुझे टीम से बाहर कर दिया। इस फैसले के बाद मुझे लगा कि अगर मैं प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं बन सकता, तो फिर वनडे क्रिकेट खेलने का कोई मतलब नहीं है।”


सचिन तेंदुलकर की सलाह: “भावुक होकर कोई बड़ा फैसला मत लो”

वीरेंद्र सहवाग उस वक्त संन्यास लेने के बारे में सोच रहे थे, लेकिन सचिन तेंदुलकर ने उनकी मदद की। सहवाग ने बताया, “मैंने सचिन से कहा कि मैं वनडे से रिटायर होना चाहता हूं, लेकिन सचिन ने मुझे समझाया कि उन्होंने भी 1999-2000 में ऐसा दौर देखा था, जब वह भी संन्यास लेने का सोच रहे थे, लेकिन वो दौर चला गया। उन्होंने कहा, ‘भावुक होकर कोई बड़ा फैसला मत लो, 1-2 सीरीज का वक्त दो और फिर सोचो।'”

सचिन की यह सलाह वीरेंद्र सहवाग के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुई। सहवाग ने इसके बाद वापसी की और अपनी अगली सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया। वह न केवल भारतीय टीम के अहम सदस्य बने, बल्कि उप-कप्तान भी बने।


2008 की त्रिकोणीय सीरीज और सहवाग का प्रदर्शन

2008 की त्रिकोणीय सीरीज में वीरेंद्र सहवाग का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं था, और उन्होंने पांच मैचों में केवल 81 रन बनाए थे। वहीं, गौतम गंभीर ने उस सीरीज में 440 रन बनाकर सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि, भारतीय टीम ने यह सीरीज जीत ली थी, लेकिन सहवाग के लिए यह व्यक्तिगत चुनौती का समय था।


सहवाग की धमाकेदार वापसी

सचिन तेंदुलकर की सलाह ने वीरेंद्र सहवाग को अपनी वापसी की प्रेरणा दी। अगले कुछ वर्षों में सहवाग ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए कई शानदार पारियां खेलीं। 2011 के वनडे वर्ल्ड कप में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया और भारतीय टीम के वर्ल्ड चैंपियन बनने में अहम भूमिका निभाई।

सहवाग ने अपनी धमाकेदार वापसी के साथ खुद को साबित किया और 2012 तक वह एमएस धोनी की कप्तानी वाली टीम के अहम सदस्य रहे। सहवाग का बल्ला हमेशा टीम के लिए रन बनाने के लिए तैयार रहता था, और उनके हमलावर खेल ने भारत को कई मैचों में जीत दिलाई।


सहवाग का आखिरी मुकाबला और संन्यास की घोषणा

वीरेंद्र सहवाग ने भारतीय टीम के लिए आखिरी टेस्ट मैच मार्च 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हैदराबाद में खेला। इसके बाद, 20 अक्टूबर 2015 को अपने जन्मदिन पर उन्होंने क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की। सहवाग के संन्यास के बाद भारतीय क्रिकेट को उनका योगदान हमेशा याद रहेगा।


सचिन और सहवाग: भारतीय क्रिकेट की ताकत

वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर दोनों ही भारतीय क्रिकेट के महानतम खिलाड़ी माने जाते हैं। सचिन तेंदुलकर ने न केवल भारत को आंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में एक नई दिशा दी, बल्कि उन्होंने सहवाग जैसे युवा खिलाड़ियों को प्रेरित भी किया। सहवाग ने अपनी तूफानी बैटिंग से भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई।


निष्कर्ष: एक महान क्रिकेटर का संघर्ष और सफलता

वीरेंद्र सहवाग का करियर संघर्षों और सफलता की मिश्रण था। उन्होंने सचिन तेंदुलकर की सलाह पर अमल करते हुए क्रिकेट से रिटायर होने के बजाय वापसी की और भारतीय क्रिकेट को 2011 विश्व कप जिताने में मदद की। उनकी धमाकेदार बैटिंग और आत्मविश्वास ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का हीरो बना दिया।

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