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निक्की हत्याकांड: भाभी मीनाक्षी का दर्दनाक खुलासा, “क्या बहू की चीखें किसी ने नहीं सुनीं?”

भाभी मीनाक्षी का दर्दनाक खुलासा

ग्रेटर नोएडा का पल्ला गांव सुर्खियों में

ग्रेटर नोएडा का पल्ला गांव इन दिनों दहेज और घरेलू हिंसा से जुड़ी खबरों को लेकर चर्चा में है। निक्की की दर्दनाक मौत ने पूरे समाज को हिला दिया है। लेकिन अब उसके बड़े भाई रोहित की पत्नी मीनाक्षी भाटी ने चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जैसे निक्की की आवाज दबा दी गई, वैसे ही उनकी चीखों को भी कभी नहीं सुना गया।


“9 साल में सिर्फ 9 महीने ही ससुराल में रही”

मीनाक्षी का विवाह 2016 में रोहित पायला से हुआ था। वे बताती हैं कि पिछले नौ सालों में उन्हें सिर्फ नौ महीने ही ससुराल में रहने का मौका मिला।

उनका आरोप है कि सास और ननद तक उन्हें बाल पकड़कर घसीटती थीं। मीनाक्षी के शब्दों में – “फर्क सिर्फ इतना रहा कि निक्की की मौत हो गई और मैं जिंदा हूँ। मेरी सांसें बची रहीं, वरना हालात एक जैसे थे।”


पंचायतों में निपटता रहा रिश्ता

मीनाक्षी का दावा है कि उनके वैवाहिक जीवन का अधिकांश समय पंचायतों में बीता।

2018 में उन्होंने पति पर दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराया था, लेकिन दबाव और समझौते की राजनीति के चलते 2020 में केस वापस लेना पड़ा। उसी साल उनके पिता की मृत्यु भी हो गई।


बेटियों और बहुओं के लिए अलग नियम

मीनाक्षी का बड़ा सवाल है कि ससुरालवालों ने बेटियों और बहुओं के लिए अलग-अलग नियम क्यों बनाए।


“इंसाफ किसे मिलेगा?”

निक्की की मौत के बाद पूरा परिवार इंसाफ की मांग कर रहा है। सोशल मीडिया पर निक्की के वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे हैं। लेकिन मीनाक्षी का सवाल है –
“जब मैं दहेज और मारपीट का शिकार थी, तब मेरी चीखें क्यों नहीं सुनी गईं? मेरे पिता ने भी अपनी जिंदगी की कमाई लगाई थी। तो क्या मेरी पीड़ा इंसाफ की हकदार नहीं थी?”


पंचायत और पैसों का खेल

मीनाक्षी का आरोप है कि पंचायतों में कई बार पैसों के सेटलमेंट की कोशिश की गई। एक बार तो समझौते की रकम 35 लाख रुपये तक तय हुई थी।
अपने पिता को याद करते हुए वह कहती हैं – “पापा कहते थे जिस दिन मैं चली गई, उसी दिन मुझे घर से निकाल दिया जाएगा। और हुआ भी वही।”


निष्कर्ष: दहेज प्रथा पर बड़ा सवाल

निक्की की मौत और मीनाक्षी के आरोप समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि उस समाज का आईना है जहाँ आज भी दहेज और पितृसत्ता के नाम पर बेटियों और बहुओं की जिंदगी बर्बाद हो रही

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