नेपाल में Gen-Z विद्रोह: भ्रष्टाचार, नेपो किड्स और ओली के इस्तीफे पर वैश्विक मीडिया की नज़र

राजनीतिक अस्थिरता और युवा क्रांति को लेकर दुनिया भर की मीडिया ने दिखाई चिंता

राजनीतिक अस्थिरता और युवा क्रांति को लेकर दुनिया भर की मीडिया ने दिखाई चिंता

नेपाल इन दिनों Gen-Z आंदोलन की लहर से गुजर रहा है, जिसने देश की राजनीतिक स्थिरता, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर गहरी बहस छेड़ दी है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बावजूद देश में हालात सामान्य नहीं हैं। इस उथल-पुथल को लेकर दुनिया भर की मीडिया संस्थाओं ने व्यापक कवरेज की है और नेपाल की सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों को उजागर किया है।


द गार्जियन: भ्रष्टाचार और असमानता आंदोलन की जड़

ब्रिटेन के अख़बार The Guardian ने इस विद्रोह को केवल सोशल मीडिया बैन का विरोध नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक आंदोलन करार दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता, उच्च स्तरीय भ्रष्टाचार और धीमी आर्थिक प्रगति ने खासकर युवा वर्ग में असंतोष को जन्म दिया है। अखबार ने यह भी बताया कि बेरोजगारी और विदेशी पलायन जैसे मुद्दों ने इस जन आंदोलन को गति दी है।


वॉशिंगटन पोस्ट: युवाओं के गुस्से का विस्फोट

The Washington Post ने आंदोलन को सरकार के भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ युवाओं की नाराजगी बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकतर प्रदर्शनकारी 15 से 30 वर्ष की उम्र के हैं जो मौजूदा शासन से निराश हैं।


साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट: कर्फ्यू और संसद पर हमला

South China Morning Post ने काठमांडू में हालात को “अव्यवस्थित और विस्फोटक” बताया है। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन कर्फ्यू का उल्लंघन कर संसद भवन के बाहर जमा हो गए थे। अखबार के अनुसार, नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता लंबे समय से जारी है, और वर्तमान में यह संकट और गहरा हो गया है।

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, नेपाल में बेरोजगारी दर लगभग 10% है और प्रति व्यक्ति आय केवल 1,447 अमेरिकी डॉलर है। इससे स्पष्ट है कि आर्थिक असमानता भी इस आंदोलन की प्रमुख वजहों में से एक है।


अल जज़ीरा: आंदोलन में बाहरी हस्तक्षेप की आशंका

Al Jazeera ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने के पीछे कुछ बाहरी तत्वों और राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ स्कूली बच्चों को भी गोली लगी, जो अब तक के सबसे संवेदनशील पहलुओं में से एक है।


द डेली स्टार: नेपो किड्स पर गुस्सा

बांग्लादेश के प्रमुख अख़बार The Daily Star ने “नेपो किड्स” शब्द को खासतौर पर उजागर किया है। यह शब्द उन नेताओं और राजनेताओं के बच्चों के लिए इस्तेमाल हो रहा है जो अपनी विलासिता भरी जीवनशैली को सोशल मीडिया पर दिखाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, टिकटॉक और रेडिट पर लाखों व्यूज़ वाले वीडियो में इनकी विदेशी यात्राओं, महंगे शौक और शाही खर्चों को उजागर किया गया, जिससे आम जनता में भारी रोष फैला।


शिन्हुआ: सीमित रिपोर्टिंग

चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ ने इस पूरे घटनाक्रम पर सीमित कवरेज दी है। उन्होंने केवल ओली के इस्तीफे की एक संक्षिप्त रिपोर्ट प्रकाशित की, जबकि अन्य वैश्विक मीडिया ने विस्तार से रिपोर्टिंग की है।


निष्कर्ष: नेपाल में गहराता असंतोष

नेपाल में चल रहा यह आंदोलन अब सिर्फ सोशल मीडिया बैन का मुद्दा नहीं रह गया है। यह व्यवस्था, असमानता, भ्रष्टाचार और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही जैसे गंभीर सवालों पर केंद्रित हो गया है। युवा पीढ़ी अब बदलाव की मांग कर रही है, जिसे अनदेखा करना सरकार के लिए मुश्किल होगा।

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