मेट्रो अस्पताल के कर्मचारी ने दिल्ली नगर निगम से धोखाधड़ी कर 74.90 लाख रुपये किए ट्रांसफर
नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक गंभीर साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें मेट्रो अस्पताल के एक कर्मचारी ने दिल्ली नगर निगम से 74.90 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए। यह राशि दिल्ली नगर निगम द्वारा मेट्रो अस्पताल के इलाज के खर्च के रूप में पेमेंट की जानी थी, लेकिन धोखाधड़ी के कारण वह रकम एक फर्जी बैंक खाते में चली गई। अब इस मामले की जांच साइबर क्राइम थाने द्वारा की जा रही है।
धोखाधड़ी का खुलासा
मेट्रो अस्पताल के अधिकृत प्रतिनिधि गोविंद शर्मा ने थाना सेक्टर-24 पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया कि मेट्रो अस्पताल ग्रुप की कैंसर यूनिट में दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों का कैशलेस इलाज किया जाता है। इलाज के बाद दिल्ली नगर निगम अस्पताल को बिल के आधार पर पेमेंट करता है। मार्च 2025 तक अस्पताल पर दिल्ली नगर निगम का 74.90 लाख रुपये का बकाया था।
जब अस्पताल प्रबंधन को भुगतान में देरी का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने दिल्ली नगर निगम के ऑफिस में जाकर इसकी जानकारी ली। वहां यह पता चला कि भुगतान तो किया जा चुका था, लेकिन रकम मेट्रो अस्पताल के अधिकृत बैंक खाते में नहीं, बल्कि एक फर्जी बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी।
फर्जी ईमेल का खेल
जांच में यह पता चला कि जनवरी 2025 में अस्पताल के कर्मचारी वैभव कुमार ने अस्पताल प्रबंधन को सूचित किया था कि पुरानी ईमेल तकनीकी कारणों से काम नहीं कर रही है। इसके बाद उसने एक नई ईमेल आईडी से दिल्ली नगर निगम को एक नए बैंक अकाउंट की जानकारी भेजी।
दिलचस्प बात यह है कि यह बैंक अकाउंट मेट्रो अस्पताल के अधिकृत अकाउंट से संबंधित नहीं था, बल्कि एक निजी अकाउंट था। इसके बाद, जब दिल्ली नगर निगम ने बिल का भुगतान किया, तो वह रकम वैभव के खाते में चली गई। इसके बाद वैभव ने अस्पताल से नौकरी छोड़ दी और मामले को अंजाम तक पहुंचाया।
जांच और पुलिस कार्रवाई
यह धोखाधड़ी 5 लाख रुपये से अधिक की थी, इसलिए थाना सेक्टर-24 पुलिस ने मामला साइबर क्राइम थाने को ट्रांसफर कर दिया। साइबर क्राइम पुलिस अब आरोपी वैभव कुमार की तलाश कर रही है और उसके बैंक अकाउंट की जांच कर रही है। पुलिस यह पता करने में लगी है कि वैभव ने किस प्रकार से अस्पताल के सिस्टम का दुरुपयोग किया और फर्जी ईमेल के माध्यम से सरकारी राशि को अपने खाते में ट्रांसफर किया।
अस्पताल प्रबंधन की ओर से सुरक्षा पर सवाल
यह घटना मेट्रो अस्पताल के सिस्टम में सुरक्षा की कमी को भी उजागर करती है। अस्पताल में फर्जी ईमेल का इस्तेमाल करके सरकारी पैसे को ट्रांसफर कराना एक बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। अब अस्पताल प्रबंधन ने सुरक्षा उपायों को सख्त करने का निर्णय लिया है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न घटित हों।
साइबर धोखाधड़ी के खतरे
यह घटना यह साबित करती है कि साइबर धोखाधड़ी कितनी तेजी से फैल रही है और इसके प्रति सजग रहना जरूरी है। इस धोखाधड़ी में फर्जी ईमेल का इस्तेमाल किया गया, जो इस प्रकार के अपराधों में एक आम तरीका बन चुका है। पुलिस अधिकारियों ने जनता को सतर्क रहने और इस प्रकार के धोखाधड़ी के मामलों में जल्दी कार्रवाई करने की सलाह दी है।
निष्कर्ष
नोएडा में हुई यह धोखाधड़ी की घटना एक बड़े साइबर अपराध को उजागर करती है, जिसमें सरकारी राशि को धोखाधड़ी से ट्रांसफर किया गया। अब पुलिस साइबर क्राइम थाने में जांच कर रही है और आरोपी वैभव कुमार की तलाश जारी है। इस मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि साइबर सुरक्षा के मामलों में और अधिक सख्ती की जरूरत है ताकि इस तरह के अपराधों पर काबू पाया जा सके।

