फौजा सिंह की मौत: सड़क पार करते वक्त गाड़ी ने मारी टक्कर
फौजा सिंह का निधन: शोक व्यक्त करते हुए पंजाब के राज्यपाल का बयान
फौजा सिंह के निधन की पुष्टि उनके परिवार के सदस्य और लेखक खुशवंत सिंह ने की, जिन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह जानकारी दी। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैराथन धावक और दृढ़ता के प्रतीक सरदार फौजा सिंह के निधन से दुखी हूं। वह रंगला पंजाब मार्च में मेरे साथ नशामुक्त पंजाब के लिए शामिल हुए थे। उनकी विरासत प्रेरणा बनेगी। ओम शांति।”
‘टर्बन्ड टॉरनेडो’ का निधन
फौजा सिंह को उनके अद्भुत साहस और नशामुक्ति अभियान के लिए ‘टर्बन्ड टॉरनेडो’ (पगड़ीधारी तूफान) के नाम से जाना जाता था। पंजाब के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त खुशवंत सिंह द्वारा लिखी गई उनकी बायोग्राफी का भी यही नाम था। खुशवंत सिंह ने ट्विटर पर लिखा, “मेरा टर्बन्ड टॉरनेडो अब नहीं रहा। मुझे बड़ी दुख के साथ यह बताना पड़ रहा है कि आज दोपहर करीब 3:30 बजे उनके गांव बियास में एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी।” इसके बाद, फौजा सिंह को जालंधर के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ा।
फौजा सिंह की प्रेरणादायक यात्रा
फौजा सिंह का जन्म 1 अप्रैल, 1911 को जालंधर जिले के ब्यास पिंड में हुआ था। उन्होंने 90 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैराथन दौड़ना शुरू किया। यह निर्णय उनके परिवार और समाज के लिए हैरान करने वाला था, क्योंकि इस उम्र में इतनी लंबी दौड़ को पूरा करना असाधारण था। फौजा सिंह ने अपनी पहली मैराथन 90 वर्ष की आयु में पूरी की, और इसके बाद उनकी उपलब्धियां लगातार बढ़ती गईं।
मैराथन की दुनिया में फौजा सिंह की अद्वितीय पहचान
फौजा सिंह ने 2004 में 93 साल की उम्र में लंदन मैराथन पूरी की। इसके बाद, 2011 में 100 वर्ष की उम्र में उन्होंने टोरंटो मैराथन पूरी की और 100+ कैटेगरी में रिकॉर्ड भी स्थापित किया। वह 100 साल से अधिक उम्र में मैराथन दौड़ने वाले पहले व्यक्ति बने। उनके इन अद्वितीय कार्यों के कारण उन्हें “टर्बन्ड टॉरनेडो” के नाम से सम्मानित किया गया और उनकी जीवन यात्रा ने लाखों लोगों को प्रेरित किया।
फौजा सिंह की उपलब्धियां
- 93 साल की उम्र में लंदन मैराथन पूरी की (2004)
- 100 साल की उम्र में टोरंटो मैराथन पूरी की और 100+ की कैटेगरी में रिकॉर्ड बनाया (2011)
- “टर्बन्ड टॉरनेडो” के नाम से मशहूर, दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावक थे
- उन्होंने नशामुक्त पंजाब अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभाई और हमेशा स्वास्थ्य और उत्साह का प्रतीक बने रहे
निष्कर्ष: फौजा सिंह की विरासत
फौजा सिंह के निधन के बाद दुनिया ने एक प्रेरणास्त्रोत को खो दिया है, लेकिन उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी। उनकी संघर्ष और साहस की कहानी आज भी हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। वह सिर्फ एक मैराथन धावक नहीं थे, बल्कि जीवन के प्रति उनके दृष्टिकोण ने पूरी दुनिया को अपनी सीमाओं को पार करने की प्रेरणा दी। उनकी यात्रा और उपलब्धियां हमें यह सिखाती हैं कि उम्र केवल एक संख्या है, और सही मानसिकता और मेहनत से कोई भी व्यक्ति किसी भी उम्र में कुछ भी हासिल कर सकता है।

