पूरे राज्य में स्कूल और कॉलेज 7 सितंबर तक बंद, हजारों करोड़ का अनुमानित नुकसान
पंजाब इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में है। रावी और सतलुज जैसी प्रमुख नदियों के उफान पर आने से राज्य के 23 जिले प्रभावित हुए हैं। बाढ़ ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, और अब तक 37 लोगों की जान जा चुकी है। सरकार ने पूरे राज्य को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया है।
बाढ़ से 1655 गांव प्रभावित, साढ़े तीन लाख लोग संकट में
राज्य सरकार के अनुसार, बाढ़ से अब तक 1655 गांव प्रभावित हुए हैं। करीब 3.55 लाख लोग सीधे तौर पर बाढ़ की मार झेल रहे हैं। राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों ने अब तक 19,474 लोगों को सुरक्षित निकाला है।
सबसे ज्यादा नुकसान: पठानकोट, गुरदासपुर और अमृतसर में
पंजाब के राज्यपाल ने बाढ़ प्रभावित पठानकोट जिले का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि पठानकोट, गुरदासपुर और अमृतसर सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं। खासकर रावी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से इन क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई है।
पठानकोट के केजुलटी क्षेत्र में सबसे ज्यादा तबाही देखने को मिली है। कई गांवों में घर तबाह हो चुके हैं और लोग बेघर हो गए हैं। प्रभावित जिलों की विस्तृत जानकारी केंद्र सरकार को भेज दी गई है।
शिक्षण संस्थान 7 सितंबर तक बंद
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए पंजाब सरकार ने राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त और निजी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय व पॉलिटेक्निक संस्थानों को 7 सितंबर 2025 तक बंद रखने का आदेश दिया है।
खेती-किसानी को भारी नुकसान, फसलें बर्बाद
बाढ़ का सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ा है। राज्य में 1.75 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। इससे किसानों की कमर टूट गई है और आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
फरीदकोट में बारिश से मकानों को नुकसान, लोग बेहाल
फरीदकोट जिले में भी हालात खराब हैं। लगातार बारिश से कई मकानों की छतें गिर गई हैं। कोटकपूरा के जैतो रोड पर एक गरीब मजदूर के घर की छत ढह गई। हालांकि परिवार सुरक्षित है, लेकिन उनका सारा सामान नष्ट हो गया है। पीड़ित परिवार ने सरकार से मुआवजे की मांग की है।
सतलुज और घग्गर नदी भी उफान पर
सतलुज और घग्गर नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। माधोपुर हेडवर्क्स से पानी छोड़े जाने के बाद रावी नदी का जलस्तर फिर से बढ़ गया है। इससे निचले इलाकों में पानी तेजी से भर रहा है।
मुख्यमंत्री ने नुकसान के आकलन की बात कही
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि जैसे ही जलस्तर घटेगा, बाढ़ से हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय नुकसान का आकलन किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि नुकसान का आंकड़ा हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
निष्कर्ष
पंजाब एक गंभीर बाढ़ संकट से जूझ रहा है। सरकार, प्रशासन और बचाव दल लगातार राहत कार्यों में जुटे हैं, लेकिन स्थिति अभी भी नियंत्रण से बाहर नजर आ रही है। आने वाले दिनों में बारिश और बढ़ती नदियों की स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है।

