पुणे (महाराष्ट्र)। ऐतिहासिक शनिवार वाडा में कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल होने के बाद पुणे में धार्मिक तनाव फैल गया। वीडियो सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने रविवार को वाडा परिसर में गौमूत्र छिड़ककर ‘शुद्धिकरण’ किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई, जिससे माहौल तनावपूर्ण बन गया।
✦ वीडियो वायरल होते ही मचा हंगामा
शनिवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें छह से सात मुस्लिम महिलाएं शनिवार वाडा के ऊपरी हिस्से में चटाई बिछाकर नमाज पढ़ती नजर आईं। आसपास बच्चे खेलते और पर्यटक घूमते दिखे। जैसे ही वीडियो सामने आया, सोशल मीडिया पर राजनीतिक और धार्मिक बहस शुरू हो गई।
भाजपा की राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा, “शनिवार वाडा में नमाज नहीं चलेगी, हिंदू समाज जाग चुका है!” उन्होंने रविवार को प्रदर्शन का आह्वान किया और सकल हिंदू समाज तथा पतित पावन संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ आंदोलन की तैयारी की।
✦ शनिवार वाडा में हुआ ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान
रविवार को मेधा कुलकर्णी के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता शनिवार वाडा पहुंचे। वहां उन्होंने उस स्थान पर गौमूत्र और गोबर छिड़ककर ‘शुद्धिकरण’ किया, जहां महिलाओं ने नमाज पढ़ी थी। कार्यकर्ताओं ने इस दौरान “शनिवार वाडा हमारा है” और “पेशवाओं का गौरव वापस लाओ” जैसे नारे लगाए।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। इस दौरान धक्का-मुक्की और हल्की झड़प भी हुई। पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को वाडा परिसर से हटाया।
✦ दरगाह के बाहर भी विरोध की कोशिश
प्रदर्शनकारियों ने शनिवार वाडा के बाहर स्थित हजरत ख्वाजा सय्यद दरगाह के पास भी विरोध जताने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान कुछ लोग घायल हुए, जबकि इलाके में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति रही।
डीसीपी कृष्णकेश रावले ने बताया कि शनिवार वाडा आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के संरक्षण में है। उन्होंने कहा कि “हम ASI से चर्चा कर आगे की कार्रवाई करेंगे।”
✦ मेधा कुलकर्णी ने दी सफाई
मीडिया से बात करते हुए सांसद मेधा कुलकर्णी ने कहा कि शनिवार वाडा महाराष्ट्र की ऐतिहासिक पहचान है और यहां किसी भी धर्म के धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमने नमाज पढ़ने की गतिविधि देखी और तुरंत पुरातत्व विभाग से संपर्क किया। हमारी मांग है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।”
उन्होंने यह भी कहा कि शनिवार वाडा छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज्य का प्रतीक है। कुलकर्णी ने यह तर्क दिया कि “अगर नमाज की अनुमति दी जाती है, तो हिंदुओं को मस्जिदों या ताजमहल में आरती करने की इजाजत मिलनी चाहिए।”
✦ विपक्ष का BJP पर हमला
इस घटना पर विपक्षी दलों ने भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी की आलोचना की है।
एनसीपी (शरद पवार गुट) की नेता रूपाली थोम्बरे ने कहा, “कुलकर्णी जानबूझकर हिंदू-मुस्लिम तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। शनिवार वाडा में दशकों से एक कब्र मौजूद है और वहां नमाज पढ़ना अपराध नहीं है। ये विवाद चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की साजिश है।”
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) ने भी इस घटना को सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश बताया और प्रशासन से शांति बनाए रखने की अपील की।
✦ शनिवार वाडा का ऐतिहासिक महत्व
शनिवार वाडा पुणे की ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका निर्माण पेशवा बाजीराव प्रथम ने वर्ष 1732 में कराया था। यह मराठा साम्राज्य की राजनीतिक और सैन्य शक्ति का केंद्र था। शनिवार वाडा का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसकी नींव शनिवार के दिन रखी गई थी।
यह किला मराठा गौरव और पेशवाओं की विरासत का प्रतीक माना जाता है। हर साल हजारों पर्यटक यहां आते हैं। इसी वजह से इसे धार्मिक स्थल के रूप में इस्तेमाल करने का विरोध किया जा रहा है।
✦ पुलिस ने संभाला हालात
पुणे पुलिस ने कहा कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट साझा करने से बचें।
प्रशासन ने शनिवार वाडा परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी है और सोशल मीडिया पर निगरानी रखी जा रही है।
✦ निष्कर्ष
पुणे का शनिवार वाडा विवाद एक बार फिर इस बात पर सवाल खड़ा करता है कि ऐतिहासिक धरोहरों में धार्मिक गतिविधियों की अनुमति होनी चाहिए या नहीं।
जहां एक ओर नमाज पढ़ने वाली महिलाओं का दावा है कि यह एक शांतिपूर्ण धार्मिक कार्य था, वहीं दूसरी ओर हिंदू संगठनों का कहना है कि ऐतिहासिक स्थलों को धार्मिक विवादों से दूर रखना चाहिए।
One thought on “पुणे में शनिवार वाडा विवाद: महिलाओं की नमाज के बाद बवाल, हिंदू संगठनों ने किया ‘शुद्धिकरण’”