प्रतापगढ़ |
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर राजेश मिश्रा के घर से पुलिस ने 2.01 करोड़ रुपये नकद, 6 किलो गांजा और 577 ग्राम स्मैक बरामद किया है। बरामद कैश की गिनती में पुलिस को 22 घंटे लग गए। यह छापा मानिकपुर थाना क्षेत्र के मुन्दीपुर गांव में पड़ा, जहां राजेश मिश्रा की पत्नी और परिवार गिरोह का संचालन कर रहे थे।
🔹 22 घंटे तक गिनती में जुटी पुलिस
शुक्रवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे मानिकपुर पुलिस टीम ने मुन्दीपुर गांव में स्थित राजेश मिश्रा के घर पर छापा मारा। घर में उस वक्त उसकी पत्नी रीना मिश्रा, बेटा विनायक, बेटी कोमल, रिश्तेदार यश मिश्रा और अजीत मिश्रा मौजूद थे।
पुलिस के पहुंचते ही घर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया गया, लेकिन जब जबरन दरवाजा खुलवाया गया तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारी दंग रह गए।
कमरे के चारों ओर काले पॉलिथिन बैगों में बंधे नोटों के बंडल, गत्तों में पैक गांजा, और लोहे के ट्रंक में छिपाई स्मैक मिली। वहां एक इलेक्ट्रॉनिक नोट गिनने की मशीन भी रखी थी, जिससे साफ था कि गिरोह पेशेवर ढंग से काम कर रहा था।
पुलिस ने जब गिनती शुरू की तो कुल ₹2,01,55,345 नकद, 6.075 किलो गांजा, और 577 ग्राम स्मैक बरामद हुए। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद माल की कुल कीमत करीब ₹3.17 करोड़ आंकी गई है।
🔹 जेल से चल रहा था नशे का नेटवर्क
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि राजेश मिश्रा, जो इस समय जेल में बंद है, वहीं से पूरा नेटवर्क संचालित कर रहा था। वह फोन और जेल मुलाकातों के जरिए निर्देश देता था कि कहाँ से माल मंगाना है और कहाँ डिलीवरी करनी है।
घर पर उसकी पत्नी रीना मिश्रा नेटवर्क की कमान संभाले हुए थी। वह बुक-कीपिंग, कैश वसूली, और डिलीवरी प्लानिंग जैसे काम खुद देखती थी। पुलिस के मुताबिक, रीना ही गिरोह की मुख्य संचालक (माफिया क्वीन) थी।
गांव के लोगों का कहना है कि उसके घर के आस-पास हमेशा डर का माहौल रहता था। रात के वक्त ट्रक आते-जाते दिखते थे, लेकिन कोई बोलने की हिम्मत नहीं करता था।
🔹 फर्जी जमानत और करोड़ों की कुर्की
जांच में पता चला है कि रीना और उसके बेटे विनायक ने राजेश मिश्रा की जमानत फर्जी दस्तावेजों के जरिए करवाने की कोशिश की थी। इसके बाद दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इससे पहले भी इस परिवार की ₹3.06 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। बावजूद इसके, गिरोह ने जेल से नेटवर्क चलाना बंद नहीं किया।
🔹 पुलिस का खुलासा – अंतरराज्यीय नेटवर्क
प्रतापगढ़ पुलिस का कहना है कि राजेश मिश्रा का नेटवर्क केवल यूपी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार बिहार और मध्य प्रदेश तक फैले हुए थे। पुलिस को शक है कि गिरोह नशे की तस्करी के साथ-साथ जमीन और शराब कारोबार में भी सक्रिय था।
बरामद नकदी और ड्रग्स की जांच अब एनडीपीएस (NDPS) एक्ट, गैंगस्टर एक्ट, और धोखाधड़ी की धाराओं में की जा रही है।
🔹 गिरफ्तार आरोपी
मानिकपुर पुलिस ने मौके से पांच लोगों को गिरफ्तार किया है—
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रीना मिश्रा (40 वर्ष) – पत्नी राजेश मिश्रा
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विनायक मिश्रा (19 वर्ष) – पुत्र राजेश मिश्रा
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कोमल मिश्रा (20 वर्ष) – पुत्री राजेश मिश्रा
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यश मिश्रा (19 वर्ष) – पुत्र अजीत मिश्रा
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अजीत कुमार मिश्रा (32 वर्ष) – पुत्र पवन मिश्रा
सभी को थाने लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ से इस नेटवर्क के और सदस्यों की जानकारी मिलेगी।
🔹 एसपी बोले – यह तो बस शुरुआत है
एसपी दीपक भूकर ने कहा—
“यह कार्रवाई संगठित अपराध के खिलाफ हमारी बड़ी मुहिम का हिस्सा है। गिरोह की जड़ें गहरी हैं, लेकिन अब इसे पूरी तरह खत्म किया जाएगा। जिन लोगों ने अपराध से पैसा कमाया है, उनकी संपत्तियों को कुर्क किया जाएगा।”
उन्होंने बताया कि अब नशे के कारोबार से जुड़े सभी संदिग्धों की डिजिटल ट्रैकिंग शुरू कर दी गई है। बैंक खातों, जमीनों और मोबाइल कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है।
🔸 निष्कर्ष
प्रतापगढ़ की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में नशे के कारोबार और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। 22 घंटे तक चलने वाली इस गिनती और करोड़ों की बरामदगी ने यह साफ कर दिया है कि अपराध की जड़ें कितनी गहरी हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि अब इस गिरोह का अंत तय है और आगे आने वाले दिनों में कई और खुलासे हो सकते हैं।

